तीन मछलियां

तीन मछलियां

By | 2018-01-20T17:07:34+00:00 January 19th, 2016|Categories: पंचतन्त्र|0 Comments

किसी तालाब में तीन मछलियां रहती थीं | उनके नाम थे अनागत विधाता, प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य | एक बार इस तालाब के पास कई मछुआरे आए और बोले-“इस तालाब में तो ढेरों मछलियां हैं | हमने कभी इस और ध्यान ही नहीं दिया | अब तो शाम हो गई है | कल सुबह आकर यहाँ मछलियां पकड़ेंगें |”

मछुआरों की बात अनागत विधाता ने सुन ली | उसने दूसरी मछलियों से कहा-“मछुआरों से बचने के लिए हमें चाहिए कि आज रात में हम दूसरे तालाब में चले जाएं | कहीं यह न हो कि कल सवेरे आकर मछुआरे हम सबका नाश कर दें अब यहाँ रुकना ठीक नहीं |”

उसकी बात सुनकर प्रत्युत्पन्नमति ने भी दूसरी जगह चलने का समर्थन किया | इन दिनों की बात सुनकर यद्भविष्य जोर से हसती हुई बोली-“अरे यह तो सोचो कि क्या हमें केवल मछुआरों की बात सुनकर अपने पुरखों का सरोवर त्याग देना चाहिए ? अगर आयु पूरी हो गई है तो दूसरी जगह जाने पर भी मौत आ सकती है | मैं तो नहीं जाउंगी | अगर तुम्हें जाना हो तो जाओ |”

उसकी यह जिद देखकर अनागत विधाता और प्रत्युत्पन्नमति नामक दोनों मछलियां अपने-अपने परिवारों को लेकर उसी रात वहां से दूसरे तालाब में प्रस्थान कर गई |

दूसरे दिन सवेरे मछुआरों ने आकर उस तालाब की सारी मछलियों को पकड़ लिया |

यह कथा सुनाकर टिटिहरी बोली-“इसलिए मैं कहती हूँ कि ‘जो होगा देखा जायेगा’ की नीति विनाश की और ले जाती है | हमें प्रत्येक विपत्ति का उचित उपाय कारण चाहिए |”

यह सुनकर टिटिहरा बोला-“मैं यद्भविष्य जैसा मूर्ख और निष्कर्म नहीं हूँ | मेरी बुद्धि का चमत्कार देखती जा | मैं भी अपनी चोंच से समुद्र का पानी बाहर निकाल कर सुखा दूंगा |”

टिटिहरी बोली-“समुद्र के साथ तुम्हारा बैर तुम्हें शोभा नहीं देता | इस पर क्रोध कस्रने से क्या लाभ ? अपनी शक्ति देखकर हमें किसी से बैर नहीं करना चाहिए, नहीं तो आग में जलने वाले पतेंगे जैसी गति होगी |”

टिटिहरा फिर भी अपनी चोंच से समुद्र को सुखा डालने की डींग मारता रहा | तब टिटिहरी ने फिर उसे मना करते हुए कहा- “जिस समुद्र को गंगा-यमुना जैसी सैकड़ों नदियाँ निरंतर पानी से भर रही हैं, उसे तुम अपनी बूँद भर उठाने वाली चोंच से कैसे खली कर दोगे ?”

टिटिहरा बोला-“मेरी चोंच लोहे के सामान कठोर है | दिन और रात बड़े लंबे होते हैं | क्या इतने समय में भी मैं समुद्र को नहीं सुखा सकूँगा ?”

टिटिहरी बोली-“यदि तुमने समुद्र को सुखाने का हठ ही कर लिया है तो अन्य पक्षियों की भी सलाह लेकर काम करो | कई बार छोटे-छोटे प्राणी मिलकर अपने से बहुत बड़े जीव को भी हरा देते हैं, जैसे चिड़ियाँ, कठफोड़े और मेढ़क ने मिलकर हाथी को मार दिया था |”

टिटिहरे ने पूछा-“वह कैसे ?”

तब टिटिहरी ने उसे यह कहानी सुनाई |

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