माँ मैं भी पढ़ने जाउंगी

Home » माँ मैं भी पढ़ने जाउंगी

माँ मैं भी पढ़ने जाउंगी

By | 2018-01-20T17:09:06+00:00 March 16th, 2016|Categories: कविता|0 Comments

माँ मैं भी पढ़ने जाउंगी,
क का की की, अ आ इ ई
ऊँचे स्वर मैं गाउंगी॥
माँ मैं भी पढ़ने जाउंगी,
दब तक अनपढ़ बैठी ,
मैं डंगर – ढोर चराऊँगी?
चौका – बासन करते-करते ,
मैं अनपढ़ ही रह जाउंगी॥
बेटी तू है बहुत ही भोली
निर्धन की खाली है झोली
भैया तो वंश चलाएगा,
तेरा सर ढकने आएगा ।
उससे मत तू तुलना कर
जा शांत बैठकर धीरज धर।
मैं तुझको समझाउंगी ।
तू ना पढ़ने जाएगी !
बाबा ने जब यह सुना,
बेटी के सर पर हाथ धरा ।
बोले बेटी तू है धन्य , धन्य
तेरे संग आशीर्वाद मेरा ॥
बेटी अब तू भी पढ़ने जायेगी ।
अपनी आशा अभिलाषा को
पूरा करके जाएगी ।
तुझ मैं भैया मैं भेद नहीं,
दोनों ने लिया जन्म यहीं।
फिर तू क्यों ना पढ़ने जायेगी ॥
तेरे पढ़ने से ही तो अब ,
घर भर मैं शिक्ष्या आएगी ।
आने वाली पीढ़ी भी
तुझ से संबल पायेगी ॥
मैंने एक सपना देखा है,
वह पूरा काना चाहूंगी ।
जब माँ थककर बैठी होगी,
मैं डाक्टर बनकर आऊँगी।
सुनकर बेटी का यह सपना ,
माँ की आँखे भर आई ,
बाबा भी सहमत बेटी से,
यह देख मंद मुस्काई ।
सब भेदभाव अज्ञान छोड़ ,
अब होने लगी पढ़ाई ।
माँ ने स्वागत में बेटी के दोनों बाहें फैलाई ॥

दीप्ति गुप्ता

Comments

comments

Rating: 5.0/5. From 2 votes. Show votes.
Please wait...
Spread the love
  • 2
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    2
    Shares

About the Author:

Leave A Comment