माँ

माँ

By | 2018-01-20T17:09:06+00:00 March 16th, 2016|Categories: कविता|0 Comments

तू है तो ममता का आँचल है,
तेरा आशीर्वाद ही अमृत जल है ।
तेरा स्वरुप महाविशाल है ,
तू सच्चाई की जगती मशाल है ।
तू ही मेरा अस्तित्व है ।
तू ही मेरा स्वाभिमान है ।
तू ही मेरा सम्मान है ।
तू ही मेरी पहचान है ।
तू ही मेरा जीवन है ।
तुमको मेरा सब अर्पण है ।
तू ही जीने की आशा है ।
तूने ही मुझको तराशा है ।
तू ही शक्ति , तू ही काली है ।
हम उपवन की तू ही माली है ।
सुधा स्नेही तेरा रुप अनोखा है ।
तेरे आँचल में छाँव और धूप है ।
मेरे माथे पर है तेरा हाथ ।
हर मोड़ पर है तू मेरे साथ ।
हर पल हर मोड़ पर साथ।
निभाना ! माँ!माँ!!!

– मुनिता कुमारी

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