आख़िर क्यूँ

आख़िर क्यूँ

By | 2018-01-20T17:08:51+00:00 April 17th, 2016|Categories: कविता|Tags: |0 Comments

प्यार इबादत है तो टकराव क्यूँ
प्यार मिलन है तो अलगाव क्यूँ
प्यार इक दिवा-स्वपन है क्या
प्यार अहसास है तो बिखराव क्यूँ !!

इश्क़ नशा है तो मज़ा क्यूँ
इश्क़ अता है तो सज़ा क्यूँ
इश्क़ कोई बला है क्या
इश्क़ खुदा है तो कज़ा क्यूँ !!

मोहब्बत इनायत है तो बगावत क्यूँ
मोहब्बत नेमत है तो तोहमत क्यूँ
मोहब्बत आख़िर है क्या चीज़
मोहब्बत बंदगी है तो नफ़रत क्यूँ !!

प्रेम पाकीज़ा है तो बंदिश क्यूँ
प्रेम स्वत: स्फूटित है तो गुजारिश क्यूँ
प्रेम इतना भी सरल है क्या
प्रेम जिंदगी है तो साजिश क्यूँ !!

– मनीष सिंह “वंदन”

Comments

comments

No votes yet.
Please wait...
Spread the love
  • 1
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    1
    Share

About the Author:

Leave A Comment