प्रेम कहानी

प्रेम कहानी

By | 2018-01-20T17:08:51+00:00 April 17th, 2016|Categories: कविता|Tags: |0 Comments

मैं शब्दों का जमींदार
तुम ख़ामोशी की अवतार
कैसे होगा मिल प्रिये
तुम रजक मैं कुम्भकार !!

चाह उधर भी है
चाह इधर भी है
चलो भाग चलते हैं
राह जिधर भी है !!

तनिक मत घबराना
पोखर पर चली आना
नई शुरूआत करेंगे
क्या कर लेगा जमाना !!

जात धर्म की ये दीवार
तोड़ना होगा मेरे यार
प्रेम दिलों का मिलन है
फ़िर इनकी क्या दरकार !!

रूसवाई होगी तो हो
दुश्व़ारी होगी तो हो
संग-संग तो होंगे ना
मौत होगी तो हो !!

– मनीष सिंह “वंदन”

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