विकास का वादा गौ-माता का सहारा…..

विकास का वादा गौ-माता का सहारा…..

By | 2018-01-20T17:08:49+00:00 April 20th, 2016|Categories: विचार|Tags: |0 Comments

विगत कुछ वर्षो से ये देखने को मिल रहा है कि जब भी देश में कहीं चुनाव आने को होते हैं तो सभी पार्टियां चाहें वह अपने आपको कथित धर्म निरपेक्ष कहने वाली हो या अकथित धर्म सापेक्ष, किसी जाति विशेष/धर्म विशेष के नाम पर अपनी रोटियां सेंकने वाली पार्टिया हों या अन्य क्षेत्रीय दल. सबके के सब विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की बात करती हैं. यदि वास्तव में ऐसा होता तो यह लोकतंत्र व देशहित में अच्छा ही होता. लेकिन इसके उलट जैसे-जैसे चुनाव की तारिखे नजदीक आने लगती हैं अपने आपको विकास के नाम पर चुनाव लड़ने वाली कहने वाली पार्टियां धर्म/जाति/मजहब, आरक्षण, व्यक्तिगत आक्षेप पर आकर जूझने लगती हैं. तो कभी मंडल/कमंडल पर. जाति व धर्म के नाम पर बनी पार्टियों व क्षेत्रीय पार्टियों की तो बात ही छोडि़ए राष्ट्रीय पार्टियां भी इसी रंग में डूबती उतराती नजर आने लगती हैं. कभी राम के नाम को लेकर अपनी राजनीति चमकाते हैं तो कभी गौ माता में अपनी माता नजर आने लगती है. जिसने अपने जीवन में कभी भगवान राम के आदर्शो को अपने पास तक फटकने नहीं दिया होगा वे ‘राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’. अगर राम ने बैतरणी पार लगा दी तो हम तो गठबन्धन धर्म निभा रहे हैं. भगवान राम जो सभी के धर्मो के भगवान राम थे वे अब केवल एक धर्म विशेष के होकर रह गये. जिसने पूरे जीवन में कभी गौ-माता को एक रोटी का टूकड़ा भी नहीं खिलाया होगा उनके लिए एक गाय, गौ-माता हो जाती हैं. कुछ तो ऐेसे भी जो इसी का व्यापार करते है लेकिन जनता के बीच अपने आपको गौभक्त दर्शाने का प्रयास करते हैं. गौमाता की हत्या पर पाबंदी दशकों से है, लेकिन निर्यात दिनों-दिन बढ़ रहा है. नये-नये लाईसेंस जारी हो रहे हैं. अपने आपको विकास की राजनीति करने वाली पार्टियां उम्मीदवारों की घोषणा करते वक्त, अन्य क्षेत्रीय पार्टियों से गठबन्धन करते वक्त यह विशेष ध्यान रखती हैं कि कहां कौन सी जाति/मजहब की बहूलता है. विकासवादी पार्टियां बड़े फक्र के साथ यह कहती नज़र आती है कि हमने इतने ब्राह्मण, इतने क्षत्रिय, इतने यादव, इतने दलित, इतने महादलित, इतने मुस्लिम …….मैदान में उतारा है. मैदान में उम्मीदवारों के उतारने के बाद शुरु होता है बेटी-दामाद, पत्नी, मां, भाई, बेटा की राजनीति का खेल, तुम्हारे शासनकाल में इतने घोटाले हुए, मेरे इतने कम. तुम्हारे शासनकाल में इतने मंत्री जेल गये मेरे में इतने कम. उसके बाद शुरु होता है डीएनए, शैतान, ब्रह्म पिशाच, ….इत्यादि.
मुफ्त खोरी के पैसों से चुनाव लड़ने वाली ये पार्टियां जनता को भी मुफ्त खोरी की आदत डालने के लिए अपने घोषणा पत्र में कहती है अगर हमारी सरकार बनी तो हम फलां, फलां को लैपटाप, स्कूटी, रंगीन टीवी, साईकिल, साड़ी, वाई-फाई की सुविधा, कर्ज माफी, मुफ्त बिजली, पानी, मोबाइल इत्यादि देंगें. इसके बाद भी जब जनता के बीच दाल गलती नजर नहीं आती तो है गौ माता अब तो तेरा ही सहारा. मेरी नैया पार लगा दे, बस चुनाव तक की बात है. चुनाव के बाद तो अगले किसी राज्य में चुनाव आने तक आप बूचड़ खाने में बेहिचक कटेगी, आपका धड़ल्ले से निर्याता होगा हम आपकी सौगंध खाते हैं बिल्कुल नहीं रोकेगे. हम आपका नाम तक भूल जाएंगें. बस चुनाव होने तक तू मेरी कष्टनिवारिणी, जगतारिणी, नैया पार लगाने वाली बन जा…….

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