प्रेम

प्रेम

By | 2016-07-17T20:46:41+00:00 May 14th, 2016|Categories: विचार|Tags: |0 Comments

प्रेम एक अहसास है जो किसी के प्रति भी हो सकता है यह एक मजबूत आकर्षण का केंद्र है । प्रेम खूद के प्रति या किसी जानवर या इन्सान के प्रति भी हो सकता है । दो व्यक्तियों के बीच के प्रेम को पारस्परिक प्रेम कहा जाता है । माता-पिता का प्रेम अपने बच्चों के प्रति नि:स्वार्थ भावना का प्रेम होता है । वैसे तो प्रकृति के हर कण-कण में प्रेम समाया हुआ है । युगों से चली आ रही प्रेम कहानियाँ आज भी अपनी मिसाल कायम किए हुए है । प्रेम एक खूबसूरत अहसास है जो दुनिया की हर कीमती चीजों से बढ़कर है । प्राचीन काल से ही लेखक, कवि, साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम की परिभाषा को व्यक्त करते आ रहे हैं । कबीर ने प्रेम को व्यक्त करते हुए कहा है-
“घडी चढे, घडी उतरे, वह तो प्रेम न होय,
अघट प्रेम ही ह्रदय बसे, प्रेम कहिए सोय ।”
कहने का तात्पर्य है कि जो प्रेम घडी में चढे व घडी मे उतर जाए वह सच्चा प्रेम नही कहा जा सकता है । सच्चा प्रेम वह है जो नि:स्वार्थ भाव से ह्रदय के हर कोने में वास करता है । सच्चा प्रेम अनछुआ अहसास होता है । जिसे सिर्फ महसुस किया जाता है । सच्चा प्रेम खूबसूरती को देखकर नहीं बल्कि सादगी को देखकर होता है । सच्चे प्रेम में हर वस्तु गौण लगने लगती है । चाहे वो कितनी भी कीमती क्यों न हो । जिस प्रकार चित्रकार, साहित्यकार, संगीतकार अपनी कृतियों के प्रति संवेदनशील होकर सच्चे प्रेम की अनुभूति करते है उसी प्रकार सच्चा प्रेम पवित्रता की ओर होता है । प्रेम शब्द को लेकर इस प्रकार से दुरुपयोग हुआ है कि हर मोड पर इसका अर्थ ही बदल जाता है । सच्चा प्रेम न तो कभी बढ़ता है और न ही कभी घटता है बल्कि अपमान करने वाले के प्रति भी उसका कोई द्वेष नहीं होता है । सच्चा प्रेम वही कर सकता है जो दूसरे के प्रति नरम तथा सद् विचारों को रखता है । अर्थात ईश्वर ही प्रेम है और प्रेम ही ईश्वर । प्रेम एक शाश्वत भाव है, प्रेम दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास है जो अच्छा, बूरा, सही, गलत के बारे में नहीं सोचता है ।

वैसे तो प्रेम को परिभाषित करना बहुत कठिन है परंतु जिसके प्रति हमारा लगाव, संवेदना तथा घनिष्ठता होती है । उसे एक तरह से प्रेम ही कहा जा सकता है । देखा जाए तो प्रेम के इतिहास से हीर, रांझा, लैला, मजनू सभी ने सच्चा प्रेम किया । इन्होंने प्रेम को एक सीमा से बँधकर नहीं रखा बल्कि इसकी असीमता को अहसास किया । आज ग्लोबलाइजेशन ने समाज को जहाँ अपनी मुट्ठी में बंद कर लिया है वहीं आज युवाओं ने प्रेम के महत्त्व को ही बदल दिया है । आज के युग में युवा बहुत प्रैक्टिकल हो गए है । जिस प्रकार से मौसम बदलता है उसी प्रकार से उनका ब्रेक अप – पैच अप होता है । यदि लाइफ में कोई गर्लफ्रेंड नहीं है तो उन्हें मज़ा नहीं है । यदि हम शादी की बात करते हैं तो वे अपने घरवालों के खिलाफ जाने को तैयार नहीं होते ।
बल्कि एक जमाना था जब लोग प्यार में मर कर अपना नाम अमर कर गए । सच्चा प्रेम तो उन्हीं लोगों ने किया है ।
शेक्सपीयर- प्रेम के स्पर्श से हर कोई कवि बन जाता है ।

जीवन में प्रेम का वही मह्त्व है जिस प्रकार फुलों मे खूशबू का है । जिस प्रकार फूलों की खुशबू को पकड़ कर या बंद कर नहीं रखा जा सकता है वैसे ही सच्चा प्रेम छुपाए नहीं छुपता । आज तो प्रेम का मतलब ही बदल गया है । आज के जमाने में प्रेम दिल से हट कर दिमाग तक पहुँच गया है । आज प्रेम को दो शर्तों से तोला जा रहा है – 1. जिसके पास पैसा हो 2. जो दिखने में सुंदर हो । आज के जमाने में यदि ये दो चीजें है तो उन्होंने प्रेम जैसे शब्द को पा लिया है । क्योंकि यदि पैसा है तो वह हर प्रेम जैसी वस्तु खरीद सकते है । और यदि सुंदरता है तो उसकी हर जगह तारीफ कर सकते है ।
प्रेम वह अहसास है जो खूबसूरती को न देख कर उसकी सादगी को मानता है । आज के युवाओं को चाहिए कि वह इस भोगवादी जिंदगी में प्रेम के महत्त्व को समझे ओर जिसके प्रति वह प्रेम करते है चाहे वह माता-पिता, बहन-भाई या अन्य कोई भी हो उसके लिए हमेशा तटस्थ रहें । मुसीबतों की घडियों में भी उसका साथ दे । आज की तेज रफ्तार भरी जिंदगी में आगे बढने की दौड में वह अपनी संवेदनाओं को खोता रहा है । प्रेम जैसे शब्द को वह भूलता जा रहा है । प्रेम की अनुभूति विलक्षण होती है जो कभी नहीं भूली जा सकती है ।

– उषा यादव,
एम फिल् शोधार्थी,

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