अमलतास के फूल

अमलतास के फूल

By | 2016-07-17T20:46:19+00:00 May 15th, 2016|Categories: कविता|Tags: |0 Comments

सीधे सीधे कर रहा, गरमी से मुठभेड़।
पीत बसन ओढ़े खड़ा, अमलतास का पेड़॥

पत्तों से ज्यादा दिखें, अमलतास पर फूल।
दुख में हर्षित हो रहा, लगता है प्रतिकूल॥

पीले फूलों से सजा, एक पेड़ है खास।
भीषण गरमी में खड़ा, ले मन में उल्लास॥

सुरभित पीत प्रसून सब, लगते स्वर्ण समान।
अमलतास को छोड़कर, पेड़ सभी वीरान॥

धरती ऐसे तप रही, जैसे हो अंगार।
अमलतास ने कर लिया, फूलों से श्रृंगार॥

– मनोज शर्मा, लखनऊ

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