जनहित सन्देश : मनहरण कवित घनाक्षरी

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जनहित सन्देश : मनहरण कवित घनाक्षरी

हाल ये न कल रहे,आज जो है चल रहे,
बनके इंसान थोडा,फर्ज भी निभाइए ।

पेड़ सब जल रहे,फिर कैसे कल रहे,
यही सब सोच सोच,पेडो को बचाइये ।

धरती पे फ़ैल रही,गंदगी को दूर करे
जल और वायु को भी,स्वच्छ तो बनाइये ।

कहता नवीन यह,खोल लो नयन दोनों,
चल के कुपथ मौत,गले न लगाइये ।

 

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