याद

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याद

By | 2016-07-19T07:25:34+00:00 July 18th, 2016|Categories: कविता|0 Comments

याद है आती उसकी
जहाँ बचपन हमने
है अपनी गुजारी
उन गलियोँ की
उन मुहल्लोँ की
जिनमे समय हमने गुजारी
याद उनकी भी सताती
जिनका सानिध्य हमने
है पाई
खेला पढ़ा साथ जिनके
गाँव की अपनी गलियोँ मेँ
छोड़ उनको मैँ चला
अपनी जवानी मेँ
क्या सोचते होँगे वे
इस तन्हाई मेँ
रात के सपनोँ मेँ…..,
याद जब भी
है आती उनकी
रो लेती हैँ
आँखे हमारी ।

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