आम

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By | 2016-07-23T00:16:30+00:00 July 19th, 2016|Categories: व्यंग्य|0 Comments

आम आम होने के साथ साथ बहुत खास है , इसके बीना न तो किसी समाज की परिकल्पना संभव है न ही राजनीति की |

आजकल कुछ लोग चाय पे चर्चा कुछ ज्यादा ही कर रहे हैं तो मैने भी सोचा कि क्यों न आज आम पे ही चर्चा कर लिया जाये |

आम चाहे गरीब की झोपड़ में हो या संसद की गलियारों में अपनी माधुर्यता के लिये विश्व प्रसिद्ध है | आम राजत्व का प्रतिक है चाहे फल हो या जनता | आम को फलों के राजा से सम्बोधन से संबोधित किया जाता है | आम के खास होने में उसके स्वाद और मिठास का बड़ा योगदान है | आम किसी में भेद नही करता चाहे राजा भोज हो या गंगू तेली |

आम कितना महत्व का है इसका अंदाजा इसी से चलता है कि मुगल बादशाह शाहजाहा के लाल किले का एक कमरे का नाम करण भी इसी पे हुआ है – दीवान – ए – आम | और दक्षिण भारत के एक शहर में पाये जाने वाले आम की एक प्रजाति का नाम भी बादशाह पड़ा |

आम वो खास शब्द है जो जनता के साथ भी जुड़ जाये तो सत्ता सुख भोगने का श्रोत बन जाता है | कुछ लोगों के लिये आम सिजनी चीज ही लगता है लेकिन यह आम गर्मी के मौसम का हो या चुनावी सरगर्मी का बड़ा खास चीज है यह | आम की राजनीति में खास होने का प्रमाण इसी से लगता है कि किसी की पार्टी का नाम ही आम से शुरू होता है और वो आज कल भारत के दिल दिल्ली पे राज भी कर रहा है |

सोचो यदि आम नही होता तो क्या होता ? न सत्ता होती न स्वाद | न गुठली होती न गुठली के दाम | दिल्ली की संसद की गलियारा हो या राज्य विधान भवन की सभी के रास्ते आम के छाव से ही गुजरते हैं , चाहे इसकी खुद की जड़ इसके पनाह मे रहने वाले ही क्यों न खोद डाले हों ? आम आम है इस लिये सब इसके लिये खास हैं , यह किसी के सर पे सोभायमान है तो किसी के जबान की |

सब आम की चिंता करते दिखते हैं लेकिन चर्चा कहीं नही करते |

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