शुभ विवाह 

शुभ विवाह 

By | 2016-10-16T00:10:38+00:00 September 4th, 2016|Categories: व्यंग्य|Tags: |0 Comments

मेरे मित्र भाई भरोसे लाल एक दिन सुबह सुबह घर आ धमके। कुछ परेशान लग रहे थे और वैसे भी जब वे परेशान होते हैं तो उन के लिए  सुबह – शाम  कुछ नही  होता है।  वे कभी भी आ धमकते हैं , चाहे इतनी सुबह की चाहे मैं सो  रहा हूँ और चाहे रात  कितनी भी देर गई हो।मैं  समझ गया कि  आज मेरे मित्र भाई भरोसे लाल जरूर कुछ परेशान हैं।  वे  शुरू हो गए कि यार आपका  कोई  पंडित या ज्योतिषी परिचित हो बताओ ?मैंने कारण पूछा तो पता चला की आज वे शुभ समाचार देने आये हैं पर समस्या भी साथ लाये  हैं।  शुभ समाचार यह  था कि  सुपुत्र का विवाह   होना है , पर समस्या यह थी की विवाह के लिए कोई अच्छी सी शुभ तिथि व मूहर्त निकलवाना है।

मैंने उन से परिहास में कहा कि बंधु यह भी कोई समस्या है भला , विवाह की तिथि ही तो बतानी है तो मुझ से अधिक शुभ तिथि कोई नही बता सकता   है अभी बता देता हूँ दो मिनट में।  उन के चेहरे पर मुझे चिंता की लकीरें   कम होती  नही दिखाई दीं पर  आश्चर्य  जरूर दिखा।  मैंने अपने एप्पल के आई पैड  में कलेंडर खोल लिया और उन से पूछा की शादी कब करनी है वे गंभीर हो कर  बोले की दो   महीने तो चाहिए।  तो मैंने कहा कि दो महीने बाद का  ही मुहूर्त   देख लेते हैं कि  जिस रविवार यानि इतवार के साथ शनिवार की कोई छुट्टी आ रही हो बस  उसी रविवार को कर लेना। और उस दिन  का  बहुत अच्छा समय भी   बता देता हूँ यानि जब बारात खूब हुड़दंग करते हुए लड़की वाले के घर पहुँच जाये तो समय यानि टाइम देख कर उस  एक घंटे बाद फेरों का  मूहर्त रख देंगे।

यह सब सुन कर भाई भरोसे लाल मुझ  पर क्रोधित हो गए। क्योंकि बे मेरे बचपन के मित्र हैं और हम दोनों को एक दूसरे के जीवन  की सभी  घटनाओं  या दुर्घटनाओं का अच्छी तरह पता भी है पता ही नही इन्हे व मुझे वे सब अब भी याद हैं कि  कब २ क्या २ हुआ है हम दोनों के साथ उन्हें अब भी याद है कि जब मैं अपने शुभ विवाह का का कार्ड उन्हें देने गया था कि  अमुक तिथि को  मेरा शुभ विवाह होना निश्चित हुआ है।  वह इन्हे आज भी याद है तो वे उसे तुरंत सुनाने लगे की हाँ पता है कि तेरे शुभ विवाह में जो हुआ और वे ब्यौरे वार उसे बताने लगे कि जब तुम्हारे  शुभ विवाह के लिए बारात चढ़ने लगी यानि बारौठी ( बारात जब लड़की वाले के घर की और जाती है )की तैयारी होने लगी तो कुछ हवा सी चले लगी फिर इसी  हल्की २ हवा ने  धीरे २ भयंकर आंधी का रूप धारण कर लिया यानि भयंकर रूप से आधी आने   लगी यह आंधी क्या तूफ़ान ही था।  शुभ विवाह की जो तैयारियां लड़की वालों ने कीं  थीं इस तूफ़ान से उन का जो हल हुआ वह दशरथ और कौसल्या के शुभ विवाह से भी अधिक भयंकर लग रहा था।  सब कुछ छिन्न भिन्न हो गया। बरात के स्वागत के लिए बिछाए गए  लाल २ सुंदर २ कालीन असुंदर हो कर बारात के बैठने के लिए रखे गए सोफों पर जा कर अपने आप तूफ़ान की ताकत से जा बिछे।  कुर्सियां दूल्हा दुल्हन के लिए बनाये मंच पर जा बैठीं।  सब कुछ अस्त व्यस्त हो गया।  शुभ विवाह में जो स्वागत की तैयारी थी वह ही आपदा प्रबंधन की तैय्यारी बन गई।

ऐसे में  बिजली को तो  गुल होना ही होता है सो बिजली गुल हो गई और साथ ही रौशनी के लिए लगाईं गईं ज्यादातर ट्यूब लाइट व बल्व बुझ तो गए ही साथ ही  टूट फूट कर जख्मी भी हो गए।  चारों और अँधेरा ही अँधेरा छा  गया।  सजावट के लिए लगाईं गईं लड़ियों का तो पता ही नही कहाँ सजने चली गईं शायद बारात के आने से पहले वे भी किसी ब्यूटी पार्लर की तलाश में भटकने  चली गईं हों। पर इस में कोई कर भी क्या सकता थाक्योंकि वे भी तो  स्त्री लिंग हैं  उन का भी तो सजने संवरने का विशेषाधिकार है और अब तो लड़के भी कौन सा पीछे हैं वे भी तो ब्यूटी पार्लर में भीड़ लगाये रहते हैं ।  पर वे लड़ियाँ अपने दुर्गा लक्ष्मी या सरस्वती रूप में सजने के बजाय काली के रूप में सज गईं।

यूँ तो आपात काल  के लिए लड़की वाले ने जनरेटर की व्यवस्था भी कर रखी थी परन्तु तूफान ने तो उस के तारों को भी ऐसे उलझा दिया की वह भी काम न आ सका।  चारों और घुप्प अँधेरा।  ऐसे में भला कितनी मोमबत्तियां जलाएं जाती और इतनी मोमबत्तियों की व्यवस्था भी कैसे होती क्योंकि यह कोई शोक सभा या किसी दुर्घटना के विरोध का प्रदर्शन या रोष प्रदर्शन  तो था नही कि लोग अपनी २  मोमबत्तियां साथ ले कर आते और आजकल तो एक साथ बहुत सारी  मोमबत्तियों के जलने का मतलब भी आप को पता ही है और वैसे भी आज कल तो सभी घरों में लगभग इन्वर्टर लग ही गए हैं इस लिए मोमबत्तियां तो मोमबत्तियां लोगों में तो मिटटी के तेल की डिब्बियां आदि तक पता नही कब की फैंक दीं हैं। और दिन में सरकार की कृपा से बिजली कटौती से  इन्वर्टर तो पहले ही सीटी  बजा चुका था।  इस लिए चारों और अंधकार का घोर सम्राज्य विराजमान हो गया।

खाना भी बरात आने से पहले ही लगभग बन ही चुका था।  तंदूर में भी लकड़ियाँ डाल कर सिलगा दिया था ताकि  बरात आने तक ठीक से गर्म हो जाये। कढ़ाई में भी तेल चढ़ा दिया था साथ ही गोल गप्पे आदि चाट के स्टाल भी सजा दिए दिए गए थे।  अब आप समझ ही गए होंगे कि उस भयंकर आंधी तूफ़ान ने इस खाने का क्या हल बनया था।  गोलगप्पे तो अवारा  लड़कों की तरह इधर से  उधर घूम  फिर रहे थे और उन में चटपटे  मसाले के पानी के  स्थान पर  प्राकृतिक वर्षा  जल परिपूर्ण हो चुका था। सब चीजों में प्राकृतिक खनिज लवण अपने आप मिल गए थे।  शाही पनीर गरीब पनीर बन गया था पालक का साग अपने प्राकृतिक रूप में आ गया जैसे सीधा खेत  से ही आया हो।  तंदूर ने भी थोड़ी देर  तो चिंगारी निकल कर गुस्सेल औरत या आदमी  की तरह भड़ास सी निकली पर वह भी कुछ देर में ही ठंडा पड  गया।

उधर वर व कन्या को भी तरह २ के उपालम्भ यानि उल्हाने सुनने को मिल रहे थे कि इन्होने पता नही कितनी हंडियां (दूध उबलने का बर्तन ) चाटीं हैं जो इतना आंधी तूफ़ान आ रहा है।  लोग भी सोच रहे थे कि इस की बरात में आ कर तो अच्छे फंसे।  अच्छी दावत खाने आये , पता नही हम ने कौन सा पाप  क्योंकि जो  हजारों के नए २ सूट पहन कर आये थे और इस सूट से पहली ही शादी ही थी पर वे सोच रहे थे इसी से कई शादी निपटा देंगे पर यह तो एक भी शादी में काम नही आया और  बेकार हो गया ड्राईक्लीन और बिना बात करवानी पड़ेगी।

साथ ही महिलाएं तो और भी अधिक मन ही मन कुढ़ रहीं थीं वे तो हजारों रूपये और कई घंटे का समय ब्यूटी पार्लर पर बर्बाद कर के आईं थीं कि सब से अच्छी फोटो उन्ही की आणि चाहिए  और महंगी साडियाँ जिन्हे वे खुद बांध सकतीं थीं उसे भी  ब्यूटी पार्लर जा कर ही स्टाइल में बंधवाया था तथा किराये पर ले गई आर्टिफिसल जलूरी का किराया भी बेकार ही गया।  बिना एक भी फोटो खींचे ही सब बेकार हो गया। कई तो  मेकअप धूल जाने के बाद पहचान में ही नही आ रहीं थीं।  हे भगवान !तू कितना न्यायकारी है कि जो जैसा  है उसे वैसा ही दिखा देता है पर वे तो भगवान को भी नही छोड़ रहीं थीं उसे भी पड़ोसन की भांति ही खूब जी भर के कोस रहीं थीं।

इतना ही नही तूफ़ान के बाद जो वारिश शुरू हुई वह थमने के बजट मूसलाधार होती चली गई।  पता नही इंद्र भगवान इन बरातियों से क्यों नारज हो गए थे  जैसे इन्होने इंद्र देवता की किसी अप्सरा को छेड़ दिया हो और वे इसी का बदला ले रहे हों। पंडाल में जगह २ पानी भर ही गया था चारों और कीचड़ ही कीचड़।  अब ऐसे में टेंट वाला भी  भला क्या करता पर जैसे तैसे इस अशुभ वातावरण में शुभ विवाह को सम्पन्न करवाया गया।  परन्तु जीवन में  सदा स्मरण रहने वाली घटना के रूप में और वैसे भी यह तो जिंदगी की भयंकर भूल होती ही है जिसे कोई नही भूलता भला शादी से बड़ी और क्या भूल  हो सकती है ? पर इस में तो आँधी ,तूफ़ान , बादल और वारिश भी थी।  इस लिए यह तो और भी यादगार बन गई।

परन्तु उन के इस संस्मरण के बाद अब मुझे भी उन्हें कुछ याद दिलाना जरूरी था कि उन की शादी में भी तो लोग बिना आंधी तूफ़ान व वारिश के ही कुछ नही खा पी  सके थे क्योंकि उन की शादी भीषण गर्मी में थी पारा  सैंतालिस डिग्री के आस पास था और ऊपर  से टेंट वालें ने पैसा तो ले लिया पर कूलरों में पानी ही नही डाला था इस लिए वे और आग बरसा कर सब को पसीने २ किये हुए थे। जो मिठाई हलवाई ने टाइम बचाने के लिए कुछ समय पहले बना ली थी वह मीठी से खट्टी हो गई थी और गर्मी के कारण लोग पानी ही पानी मांग रहे थे।  पानी पी २ कर सब का पेट तो वैसे ही फूटने को हो रहा था पर फिर भी प्यास नही बुझ रही थी तो खाने की ओर  तो किसी के पैर ही नही पड  रहे थे।

आप की शादी में भी भाई बिना बरसात के भी महिलाओं का हजारों रूपये का मेकअप पसीने से ही पूरा का बाह गया था और यहां तक की उन की बिंदी  भी माथे के बजाय कहीं और ही जा पहुंची थी।  कुछ समय तक तो वे पसीना पौंछने से बचती रहीं फिर कुछ देर बाद वे फ़िल्मी स्टाइल में धीरे २ छू  २ कर पसीना पौंछती रहीं पर आखिर यह  कितनी  चलता और जब हद हो गई तो वे आ गई ठेठ देसी अंदाज मे ,ले कर पल्लू शुरू हो गई पसीना पुंछने में और हो गयी मेकअप की ऐसी तैसी। सुगंध  के लिए लगाया गया सेंट पसीने की बदबू में मिल कर अजीब सी दुर्गन्ध पैदा कर रहा था कपड़े भी पसीने तरबतर थे बच्चो का तो और भी बुरा हाल था बेचारे गर्मी के कारण  रोये जा रहे थे जिस से उन के पापा जी  को बड़ी परेशानी हो रही थी क्यों कि शादी समारोह आदि में तो बच्चों की जिम्मेदारी उन्ही की होती है  ताकि पत्नी जी  मेकअप बना रहे और ब्यूटी पार्लर से बंधवाई हुई सदी ठीक से बंधी रहे।  इस लिए जरा इसे पकड़ लो के कारण उन्हें ही इस की जिम्मेदारी संभालनी पड   जाती है और वैसे भी बतरस में डूबी स्त्रियां भला बच्चे का कहाँ ख्याल रख पातीं  हैं  इस लिए ऐसे समय में ममता के स्थान पर बापता  ही काम आती है।

इतना ही नही आप के यहां आये मेहमानों को आप ने पता नही  क्या खिलाया या कैसा पानी पिला दिया था वे बेचारे बार बार शौचालय कीऔर भाग रहे थे जहां पर लम्बी २ लेने लगी हुईं थीं और कुछ तो शौचालयों के दरवाजों को पीटते हए कह रहे थे कि  जल्दी निकलो नही तो उन की निकल जाएगी और खाने में भी हलवाइयों को कम ही नमक डालना पड़ा होगा क्योंकि  उन का पसीना ही इतना निकल रहा था यह ऑर्गेनिक नमक बिना मिलाये ही स्वत्: ही खाने में मिल रहा था।  पर भाई आप के कार्ड पर भी शुभ विवाह ही लिखा हुआ था।

और वैसे भी जब कभी बेमौसम आंधी बादल  या वारिश हो तो हम समझ ही जाते हैं कि कहीं न कहीं अवश्य ही शुभ विवाह आयोजित हो रहा होगा क्योंकि चाहे सर्दी हो चाहे गर्मी हो हमारे यहां शुभ विवाह में आंधी बादल  तो आ  ही जाते हैं जिसे शुभ मान  लिया जाता है।  हो सकता है ज्योतिषी कंजूस लोगों को मुहूर्त दिखाने पर ऐसा शुभ  मूर्हत बता देते हों जिस में आंधी वारिश आ जाये क्यों की ज्योतिषी जी सोचते होंगे कि खुद तो  सब चीज में मोटा कमीशन लेते हैं और हमें विवाह की रकम का चौथाई क्या दो पैसे प्रतिशत भी दक्षिणा में  नही देते हैं तो लो भुगतो आंधी वारिश को पता चल जायेगा।

परन्तु भाई एक बात बताओ कि जो लोग बिना शुभ मुहूर्त के ही शादी कर लेते हैं क्या उन के विवाह शुभ नही होते हैं।  पर ऐसा नही होता है ।  आप को पता ही है कि हम दोनों के विवाह भी तो घर वालों ने खूब शुभ मुहूर्त दिखा कर करवाये थे परन्तु फिर भी हमारी दोनों की श्री मती जी  से हम दोनों को माँ क्यों परेशान रहतीं हैं या वे दोनों एक दूसरे को क्यों परेशान करतीं रहतीं हैं। और जिन के विवाह वैसे ही हो जाते हैं  हमे शुभ विवाह द्वारा प्राप्त पत्नियां  भी उन्ही की पत्नियों की  तरह ही क्यों धमकातीं हैं जैसे बिना शुभ विवाह वाली पत्नियां  धमकतीं हैं।

भाई भरोसे लाल आप ने भी  सभी शादी के कार्डों पर शुभ विवाह लिखा ही देखा है पर उन में भी खूब अशुभता क्यों आ जाती है।  खूब तलाक हो जाते हैं  खूब झगड़े हो जाते हैं , कइयों को संतान नही होती ,  कई दूसरी प्रेमिका या प्रेमी रख लेते हैं और कोई २ तो प्रेमी या प्रेमिका के साथ मिल कर अपने पति  परमेश्वर या पूज्य नारी का काम तमाम करने से भी चूकते हैं।

एक बात और है कि हम भी शुभ विवाह को अशुभ कर देते हैं बरौठी या बारात के चढ़त के समय जो अशुभ हुड़दंग करते हैं वह क्या शुभ विवाह का लक्षण है पंडित जी लग्न गोधूली वेला की निकलते हैं और बारात पहुँचती है लड़की के घर आधी रात को क्यों की लड़के के परम मित्रों पर किसी का भी वश नही चलता है फिर शुभ विवाह में अशुभ असुर सुरा पान की भी तो नदियां बह जातीं  हैं। और बाकि शुभ मुहूर्त  रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ फोटो खिंचवाने  में निकल जाता है। तथा फेरे के समय भी संबधी लोग पंडित को शुभ विवाह कहाँ करेंने देते है सोचते हैं दस मिनट में ही फेरे निबट जाएँ तो घर को निकले कि लो हो गया खेल खत्म अब इजाजत दो चलते हैं।

इसी लिए भाई भरोसे लाल आप बेकार में परेशान हो रहे हो।  शुभ मुहूर्त के चककर में।  मेरी बात मानों तो किसी भी छुट्टी  के दिन आराम से तिथि निश्चित कर दो और ख़ुशी २ शुभ विवाह सम्पन्न कर लो ईश्वर की कृपा से।

— डॉ  वेद व्यथित 

In Roman

Shubh Vivah

Mere mitra bhai bharose lal ek din subah subah ghar aa dhamke. Kuch paresan lag rahe the aur wo bhi jab wo paresan hote hain to unke liye subah-saam kuch nahi hota. We kabhi bhi aa dhamakte hain, shahe chahe itne subah ki main so raha hu aur chahe raat kitni bhi der ho gayi ho. Main samajh gaya ki aaj mera mitra bhai bharose lal jarur kuch paresan hain. We suru ho gaye ki yaar aapka koi pandit ya jyotisi parichit hai to batao? Maine karan pucha to pata chala ki we aaj subh samachar dene aaye hain aur samasya bhi sath laye hain. Subh samachar yah tha ki suputra ka vivah hona hai. Par samasya yah thi ki vivah k liye koi achhi si subh tithi wa muhurt nikalwna hai.

 

Maine unse parihas me kahaki bandhu yah bhi koi samasya hai bhala, vavah ki tithi hi to batani hai to mujha se adhik subh tithi koi nahi bata sakta hai abhi bata deta hu do minute me. Unnke chehre par mujhe chinta ki lakiren kam hoti nahi dikhai di par aascharya jarur dikha. Maine apne apple i pad me calendar khol liya aur unse pucha ki shadi kab karni hai wo gambhir ho kar bole do mahine to chahiye. To maine kaha do mahine baad ka muhurt dekh lete hain ki jis ravivar yani etwar k sath saniwar ki chhuti aa rahi ho bas usi ravivar ko kar lena. Aur us din ka bahut achha samay bhi baata deta hu yani jab barat khub hurdang karte huwe larki wale k ghar pahuch jaye to samay yani time dekh kar us ek ghante baad feron ka muhurt rakh denge.

 

Yah sab baat sun kar bhai bharose lal mujh par krodhit ho gaye. Kyon ki we mere bachpan k  mitra hain aur hum dono ko ek dusre ke jiwan ki sabhi ghatnawon ya durghatnawon ka achhi tarah pata bhi hai pata hi nahi unhen we mujhe we sab ab bhi yaad hain ki kab kab kya kya hua hai hum dono k sath unhe ab bhi yaad hai ki jab main apne subh vivah ka card unhe dene gaya tha ki aamuk tithi ko mera vivah hona nischit hua hai. Wah inhe aaj bhi yaad hai to we use turant sunane lage ki haan pata hai ki mere subh vivah me jo hua aur we baiwre waar use batane lage ki jab tumhare subh vivah k liye barat chadhne lagi yani baarouthi( baarat jab larki wale k ghar ki taraf jati hai) ki taiyari hone lagi to kuch hawa si chalne lagi fir  isi halki halki hawa ne dhire dhire bhayankar rup dharan kar liya yani bhayankar rup se aandhi aane lagi yah aandhi kya tufan hi tha. Subh vivah ki jo taiyari larki walon ne ki thi is toofan se unka jo haal hua wah dasrath aur kosaya ke subh vivah se bhi adhik bhayankar lag raha tha. Sab kuch chin bhinn ho gaya. Baarat ke swagat ke liye lal lal sundar sundar kalin asunder ho kar baraat k baithne k lilye rakhe gaye sofe par ja kar apne aap tufan ki taqut se ja biche. Kursiyan dulha dulhan k liye banaye gye manch par ja baithi. Sab kuch ast wayast ho gaya. Subh vivah jjo swagat ki taiyari thi wah hi aapda prabandhan ki taiyari ban gayi.

 

Aise me bijli ko to gul haona hi hota hai so bijli gul ho gayi aur sath hi roshni k liye lagayi gayi jyadatar tyube light wa bulb bujh to gaye hi sath hi sath tut kar jakhmi bhi ho gaye. Charon or andhera hi andhera chha gaya. Sajawat k liye lagayi gayi lariyan ka to pata hi nahi kahan sajne chali gayin sayad barat k aane se pahle wo bhi kisi beauty parlor ki talash me bhatakne chali gayi ho. Par isme koi kar bhi kya sakta tha kyon ki we bhi to striling hain  unka bhi to sajne sawarne ka vivesadhikar hai aura b to larke bhi kaun sa piche hain we bhi beauty parlour me bhid lagaye rahte hain. Par we lariyan apne durga laxmi ya saraswati rup me sajne k bajaye kali k rup me saj gayin.

 

Yun to aapat kal k liye larkiwale ne generator ki wayawastha bhi kar rakhi thi parantu tufan ne uske taron ko bhi aise uljha diya ki wah bhi kaam na aa saka. Charon or dhupp andhera. Aise me bhala kitni mombatiyan jalayi jati aur itni mombatiyon ki waywastha bhi kaise hoti kyon ki yah koi sok sabha ya kisi durghatna ka virodh pradarshan ya ros pradarsan to tha nahi ki log apni apni mombatiyan sath le kar aate aur aaj kal ek sath bahut sari mombatiyon ko jalane ka matlab bhi aapko pata hai aur waise bhi aajkal sabhi gharon me lagbhag inverter lag hi gaye hain. Isliye mombatiyan to mombatiyan logon ne to mitti k tel ki dibbiyan aadi tak pata nahi kabtak fenk di hain. Din me sarkar ki kripa se bijlli katauti se inverter to pahle hi siti baja chukka tha. Isliye charo or andhakar ka ghor samrajya birajman ho gaya.

 

Khana bhi barat aane se pahle hi lagbhag ban hi chukka tha. Tandooor  me bhi lakadiyan dal kar silga diya tha taki barat aane tak thik se gaarm ho jaye. Kadahi me bhi tel chadha diya tha sath hi gol gappe aadi  ke stall bhi saja diye gaye the. Ab aap samajh hi gaye honge ki us bhayankar aandhi tufaan ne is khaane ka kya haal banaya tha. Gop gappe to aawara larko ke tarah idhar udhar ghum rahe the aur unme chatlpate masale ke pani ke asthan par prakritik warsha jal paripurn ho chukka tha. Sab chij me prakritik khanij lawan apne aap mil gaye the. Shahi  paneer garib paneer ban gaye the palak ka saag apne prakritik roop me aa gaya tha jaise sidha khet se hi aaya ho. Tandor ne bhi thodi der tak to chingari nikaal kar gusail aurat ya aadmi ki tarah bhadas to nikali par wah bhi kuch der me thanda pad gaya.

 

Udhar war wa kanya ko bhi tarah tarah k upalabh yani ulahne sunne ko mil rahe the i inhone ne pata nahi kitni hadiyan( dudh ubalne ka bartan) chatin hain jo itni aandhi tufaan aa raha hai. Log bhi soch rahe the ki iski barat me aa kar ache fase. Achhi dawat khane aaye, pata nahi humne koun sa pap  kyonki jo hazaron k naye naye suit pahankar aaye the aur is suit se pahli hi shaddi hi thi par we soch rahe the isi se kai shaadi nipta denge par yah to ek bhi shadi me kaam nahi aaya aur bekar ho gaya aur dryclean bina baat karwani paregi.

 

Satah hi mahilayen to aur hi man hi man kudh rahi thin we to hazaron rupay aur kai ghanton ka samay beauty parlour  par barbad kar k aayi thi ki sabse achhi photo unhi ki aani chahiye.aur mahangi sadiyan jinhe we khud bahdh sakti thi use bhi beauty parlour hi ja kar style me bandhwaya tha tatha kiraye par le gayi artificial jwelry ka kiraya bhi bekar ho gaya. Kai to make up dhul jane ke baad pehchan me hi nahi aa rahi thi. Hey bhagwan! Tu kitan nyaykari hai ki jo jaisa hai use waisa hidikha deta hai par we bhagwan ko bhi nahi chod rahi thi.  Use bhi padosan ki bhanti hi khub ji bhara k kosh rahi thi.

 

Itna hi nahi tufan k baad jo baris suru hui wah thamne k bajaye musladhar hoti chali gayi. Pata nahi indra bhagwan in baratiyion se kyon naraz ho gaye the jaise inhone indra dewta ki kisi apsra ko ched diya ho. Pandal  me jagah jagah pani bhar hi gaya tha  charo or kichad hi kichad. Ab aise me tent wala bhi bhala kya karta par jaise taise is subh watawaran me subh vivah sampan karaya gaya. Parantu jiwan me sada sansmaran rahne wali ghatna ke rup me aur waise bhi yah to jindgi ki bhayankar bhul hoti hi hai jise koi nahi bhulta bhala shadi se badi aur kya bhul ho sakti hai? Par isme to aandhi, toofan , badal, aur waris bhi thi. Isliye yah to aur bhi yaadgar ban gayi.

 

Parantu unke is sansmaran k baa dab mujhe mujhe bhi unhe kuch yaad dilana jaruri tha ki unki shadi me bhi to log bina aandhi, toofan ,wa waris k hi kuch nahi kha pi sake the kyon ki unki shadi bhisna garmi me thi para saintalish degree ke aas pass tha aur upar se tent wale  ne paisa to liya par coolar me pani hi nahi dala tha isliye we aur aag barsakar sab ko pasine pasine kiye huwe the. Jo mithai halwai ne time bachane k liye kuch samay pahle bana lit hi wah mithi se khatti ho chuki thi aur garmi k karan log pani hi pani mang rahe the. Pani pi pi kar sab ka pet waise hi futne ko ho raha tha par fir bhi pyas nahi bujh rahi thi to khane ki or to kisi ke pair hi nahi pad rahe the.

 

Aapki shadi  me bhi bhai bina barsat mahilaon ka hazaron ka make up pasine se hi pura bah gaya tha aur yahan tak ki unki bindi unke mathe k bajaye kahi aur ja chipki thi. Kuch samay  tak to we pasine pochne se bachti rahin fir kuch der baad we filmy style me dhire dhire chu chu karr pasina pochti rahin par aakhir yah kitni chalta aur jab had ho gayi to we aa gayi thethi desi andaj me , le kae pallu suru ho gayi pasina pochne me aur ho gayi make up ki aisi taisi. Sugandh k liye lagaya gaya sent pasine me mil kar ajib sa durgandh paida kar raha tha kapde bhi pasine se tarr batarr the bachhon ka to aur bhi bura haal tha bechare garmi k karan roye ja rahe the jis se unke papa ji ko badi paresani ho rahi thi kyonki shadi samaroh aaadi me bachhon ki jimmedari unhi ki hoti hai taki patni ji make up bana rahe aur beauty parlour se bandhwai gayi saree thik se bandhi rahe. Is liye jara ise pakad lo k karan unhe hi unki jimmedari sambhalni pad jati hai aur waise bhi batras me dubi striyan bhala bachhe ka kahan khayal rakh pati hai is liye aise samay me mamta ke asthan par bapta hi kaam aati hai.

 

Itana hi nahi aap ke yahan aaye mehmano ko aapne pata nahi kya khilaya ya kaisa pani pila diya tha we bechare bar bar saouchalay ki taraf bhag rahe the jahan par lambi do lane lagi hui thi aur kuch to sowchalay k darwaje pit te hue kah rahe the ki jaldi niklo nahi to unki nikal jayegi aur khane me bhi halwaiyon ko kam hi namak dalna pada hoga kyon ki  unka pasina hi itna nikal raha tha yah organic namak bina milaye khane me mil raha tha. Par bhai aap k card par bhi subh vivah likha tha.

 

Aur waise bhi kabhi be mousam aandhi, badal ya baris ho to hum samajh hi jate hain ki kahin na kahin awasya hi subh vivah aayojit ho raha hoga kyonki chahe sardi ho ya garmi ho hamare yahan subh vivah me aandhi badal aa hi jate hain jise subh man liya jata hai. Ho sakta hai jyotisi kanjus logon ko muhurt dukhane par aisa subh muhurt bata dete hon jisme aandhi baris aa jaye kyon ki jyotisi ji sochte  honge ki khud to sab chij me mota commission lete hain aur hume vivah ki rakam ka chouthai kya do paise pratisat  bi dakishna me nahi dete hain to lo bhugto aandhi baris ko, pata chal jayega.

 

Parantu bhai ek baat batao ki jo log bina subh muhurt ke hi shadi kar lete hain kya unke vivah subh nahi hote hain?  Par aisa nahi hota hai. Aapko pata hi hai ki hum dono k liye vivah bhi to gharwalon ne khub subh muhurt dikhwa kar karwaye the parantu fir bhi hum dono ki sree mati jee se hum dono ki maa kyu paresan rahti hai ya we ek dono ko kyu paresan karti rahti hai. Aur jinke vivah waise hi ho jate hain waise hi ho jate hain hume subh vivah dwara prapt patniyan bhi unhi ki patniyon ki tarah  hi kyu dhamakti hain.

 

Bhai bharose lal aap ne bhi sabhi shadi k cardon par subh vivah hi likha hi dekha hai par unme bhi khub asubhta kyu aa jati hai. Khub jhagde ho jate hain, kaiyon ko santaan nahi hoti, kai dusri premika ya premi rakh leti hain aur koi koi to premi premika k sath milkar apne pati parmeswar ya pujya nari ka kaam tamam karne se bhi nahi chukte hain.

 

Ek baat aur hai ki hum bhi subh vivah ko asubh kar dete hain barouti ya baraat ke chadhat ke samsay jo ashubh hurdang karte hain wah kya subh vivah k lakshan hai? Pandit ji lagan godhuli bela ki nikalte hain aur barat pahuchti hai larki k ghar aadhi raat ko. Kyonki larke k param mitron par kisi ka was nahi chalta hai fir subh vivah me ashubh asur sura paan ki bhi to nadiyan bah jati hain. Aur baaki subh muhurt ristedron aur doston k sath photo khichwane me nikal jata hai. Tatha fere ke samay bhi sambandhi log pandit ko subh vivah kaha karne dete hain sochte hain das minute me hi fere nibat jaye to ghar ko nikle ki lo ho gaya khel khatam ab ijajat do chalte hain.

 

Isiliye bhai bhrose lal aap bekar paresan ho rahe ho. Subh muhurt k chakkar me. Meri baat mano to kisi bhi chhuti k din aaram se tithi nischit kar do aur khushi khushi shubh vivah sampan kar lo ishwar ki kripa se.

Dr. Ved Wyathit

 

 

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