दो बातें

दो बातें

नमस्कार ,
दो बातें तो तय हैं , पहली बात भारत के लोकतंत्र के इतिहास में ऐसा देखने को मिल रहा है कि , जनता पहली बार किसी प्रधानमंत्री को इस तरह सर आँखों पर बिठा रही है , जैसे किसी विवादित मठ को उसका मठाधीश कई वर्षों के संघर्ष के बाद मिला हो ,किसी बलात्कार से पीड़ित महिला को उसका न्याय कितने संघर्षों के बाद मिला हो ,ठीक वही ख़ुशी आज हिंदुस्तान के जनों को है ,उन्हें उनका मठाधीश मिलने पर, या ये कह लीजिये कि तमाम वर्षों से पीड़ित एक विशेष बहुसंख्यक वर्ग जो अपने आपको पीड़ित समझता था उसे कुछ आशा कि उम्मीद दिखाई दे रही है अपने मठाधीश से , जो सिर्फ इस बात से अपने आपको पीड़ित समझता था क्यूंकि उसको बहुसंख्यक होते हुए भी दोयम दर्जे पर तरजीह दी जाती रही अब तक ,उसको इस बात पर मलाल रहा कि उसके देश में किसी और कौम को कैसे तरजीह दी जा सकती है ,खैर अब उनके अच्छे दिन आने शुरू हुए हैं , और हम उन्हें बधाई भी देते हैं क्यूंकि उनके सपनो को पूरा करने वाला राजकुमार आ गया दिल्ली के सिंघाशन पर , उन्हें अपने उसी पुराने कल्पनीय पूर्व विश्वगुरु होने का दंभ भरने का मौका फिर से मिलने वाला है |
अब आतें है दूसरी बात पर , आबादी बढ़ने के साथ साथ हमारा युवा होने का औसत भी बढ़ता जा रहा है और हम सभी जानते है युवा शक्ति कुछ भी करने का साहस रखती है वो चाहे तो धरती को रौंद कर रख दे अपने पौरुष से ,मगर आज युवा ने सीखना बंद कर दिया है ,सोचना छोड़ दिया है ,सिर्फ चुटकुले पास करना और ड्रेस सिलेक्शन तक सीमित होता जा रहा है युवा , लेकिन जिस बात को मैं कहना चाह रहा हूँ , इन सबके साथ साथ युवाओं में एक और खराबी आ रही है असहनशील होने की प्रवत्ति , आज हम आसानी से देख सकते हैं अगर डेल्ही के राजकुमार कि तरफ कोई आँख उठा कर भी देख रहा है तो उसकी दोनों आँखे निकालने कि कोशिश की जाती जाती हैं , मुद्दों का कोई अस्तित्व नही रह जाता ,बात सिर्फ इस बात पे अटक जाती है तुमने ये कहा कैसे ? और प्रश्नचिन्ह खड़ा हो जाता है सवाल करने वाले के ऊपर , उसकी बोलने कि आजादी पर , फ्रीडम टू स्पीच पर यहाँ तक कि टिकेट का पैसा देने वालों कि तो भीड़ सी लग जाती है ,और इन सब कि भीड़ में हम भूल जाते हैं हिन्दुस्तान के मूल लक्षण को जिसके कारन ये हिन्दुस्तान है ,”सहनशीलता “, और कोसने लाग जातें हैं उस व्यक्ति को जिसने हमसे कुछ बातों के जवाब से मांगे थे , हमे आईना दिखलाया था ,उसने बताया कि ये भी बुराईयाँ है हुजुर, इधर भी ध्यान दें ,पर हम नहीं देंगे क्यूनी हम तो सुनना नही चाहते आपकी पर ये बतलाएं कि आप इस देश में रहना चाहते हैं या नहीं ???? अगर हाँ तो हमारी शर्तों पे रहे ये गजब का ट्रेंड बनता जा रहा है इन दिनों ||
कुछ ताजे उदहारण ले लेते हैं , सिद्धू जब तक सत्ता के साथ में थे सबकी आँखों के तारे थे ४५० से ज्यादा सभा कि थी २०१४ के आवामी चुनाव में , मगर वो आज अगर पंजाब के लिए अलग हुआ ,मुद्दों पर अलगाव था वो और सही अलगाव था तो वो भक्तों कि आँखों में चुभ सा गया , अगर हम बिहार के सुशाशन बाबु से अलग हो सकते हैं जो अच्छा काम कर रहे थे तो बादल से क्यूँ नही जिसका शाशन पुरे पंजाब को गर्त में ले जा रहा है , सिद्धू अलग हुए इस बात पर पर हमने उसे अपने तीर के निशानों पर ले लिया |
ये बात तो कुछ पुरानी हो गयी नयी बात कपिल का एक ट्वीट आता है , सही सवाल था मगर आज सुबह जब हमने अपना इन्टरनेट खोला हिंदुत्व.कॉम कि तरफ से तुरंत कपिल के पुरानी बातों को ले जा कर खोदा जाने लगा ,व्यंग लिखने वाले तुरंत हावी हो गये उस पर ,अब हमे कपिल के सवाल से कोई मतलब है ही नही , हमें मतलब ये है कि तुमने ये कहा कैसे?
“बात वाली बात है भाई ”
भारत के प्रधानमंत्री को g २० समिट में पहली बार प्रथम पंक्ति में खड़ा होते देख मेरा भी सीना ५६ इंची हुवा लेकिन हम तो वो है जो चाँद को भी अमावस्या पर काला कह देते है तो अगर कोई कुछ जवाब मांग ले तो असहनशील मत हो , जवाब दो जिम्मेदारी तुम्हारी है तुम्ही ने तो कहा था
“कश्ती पर गर आंच आ जाए तो हाथ कलम करवा देना ,
लाओ हमे पतवारें दे दो मेरी जिम्मेदारी है ”
अब अगर अच्छे दिन शताब्दी और दुरंतो से आयेंगे तो हर कोई पूंछेगा ||
भाई असली लोकतात्र वो है जिसमे पंक्ति में अंतिम स्थान पर खड़े आदमी को भी अपनी बात कहने क पूरा अधिकार हो , लड़ो मकसद के लिए गिरो तो बीज कि तरह कि पूरा पौधा बो जाओ ||
धन्यवाद
कृष्ण कुमार शुक्ल “विद्यार्थी ”

In Roman

Namaskar,

Do baten to tay hai, pahli baat bharat k loktantra k itihas me aisha dekhne ko mil raha hai ki, janta pahli bar kisi Pradhan Mantri ko is tarah sir aankhon par bithi rahi hai, jaise kisi vivadit math ko uska mathadhis kai varson ke sangharsh k bad mila ho,  kisi balatkar se pirit mahila ko uska nayay kitne sangharson k bad mila ho. thik vahi khushi aaj Hindustan k jano ko hai , unhen unka mathadhis milne par, ya ye kah lijiye ki tamam varson se pidit ek vises bahusankhayak warg jo apne aap ko pidit samajhta tha use kuch aasha ki ummid dikhai de rahii hai apne mathadhis se, jo sirf is baat se apne aap ko pidit samajhta tha kyu ki usko bahusankhayak hote huwe bhi doyam darje par tarjih di jati rahi ab tak , usko is baaat par malal raha ki uske desh me kisi aur koum ko kaise tarih di ja sakti hai , khair ab unke ache din aane suru huwe hain ,aur hum unhen badhai bhi dete hain kyu ki unke sapno ko pura karne wala raj kumar a gaya dilli ke sihasan par , unhe apne usi purane vishwa guru hone ka dambh hone ka mauka fir se milne wala hai. Ab aate hain dusri baat per, aabadi badhne k sath sath humara yuwa hone ka ausat bhi badhta ja raha  hai aur hum sabhi hai yuwa shakti kuch bhi karne ka sahas rakhti hai wo cahe to dharti ko round kar rakh de apne pourus se ,magara aaj yuwa ne sikhna band kar diya hai , sochna chod diya hai , sirf chutukule pass karna aur dress selection tak simit hota ja raha hai yuwa, lekin jis baat ko main kahna chah raha hun , in sab k sath sath yuwaon me ek aur kharabi aa rahi hai asahansilta hone ki prawriti , aaj hum aasani se dekh sakte hain agar delhi k rajkumar ki taraf koi aankh utha kar  bhi koi dekh raha hai to uski dono aankhen nikalne ki kosis ki jati hai , muddon ka koi astitwa nahi rah jata, baaat sirf is baat  pe atak jati hai tumne ye kaha kaise ? aur prasna chinh khada ho jata hai sawal karne wale k upar , uske bolne ki aajadi par , freedom to speech par yahan tak ki ticket ka paisa dene walon ki to bheed si lag jati hai , aur in sab ki bhid me hum bhul jate hain Hindustan k mul lakshasn ko jis k karan ye Hindustan hai , “ Sahansilta “, aur kosne lag jate hain us waykti ko jisne humse kuch baaton k jawab se mange the , hume aaina dikhlaya tha, usne bataya ki ye bhi buraiyan hai hujur, idhar bhi dhayan den ,par hum nahi denge kyu k hum to sunna nahi chate aapki par ye batlayen ki aap is desh me rahna chahte hain ki nahi ??? agar haan to hamari sarton pe rahen ye gajab  ka trend banta ja raha hai in dino..

Kuch taje udaharan le lete hain , sidhu jab tak satha k sath me the sabki aankhon k tare the 450 se jyada sabha ki thi 2014 ki aawami chunaw me , magar wo aaj Punjab k liye alag hua, muddon par abhaw tha aur sahi aalgaw tha wo  , hagton ki aankhom me chubh sa gaya , aagar hum bihar k shushan baabu se alag ho sakte hain jo achha kaam kar rahe the to badal se kyun nahi jiska sasan pure Punjab ko gart me le ja raha hai, sidhu alag huwe is baat per  hume use tir k insane per le liye. Ye baat to kuch purani ho gayi nayi baat to kapil ka ek tweet aata hai , sahi sawal tha magar aaj subah jab humne aapna internet khola Hindustan.com ki taraf se turant kapil ke purani baton ko le ja kar khoda jane laga , vyang likhne wale turant hawi ho gaye us par, ab hume kapil k sawal se koi matlab hi nahi, hume matlab ye hai ki tumne ye kaha kaise ??

“ baat wali baat hai bhai” Bharat k pradhanmantri ko G20 summit me pahli baar pratham pankti me khada hote dekh mera v sin 56 inch hua lekin hum wo hain jo chand ko v aamawasya par kala kah dete hain to agar koi kuch jawab maang le to asahansil mat ho jawab do jimmedari tumhari hai tumhi ne to kaha tha “ kasti per agar aanch aa jaye to hath kalam karwa dena , laao hume patwaren de do meri jimmedari hai” ab agar ache din satabdi aur duranton se aayenge to sab koi puche ga. Bhai asli loktantra wo hai jisme pankti me antim asthan par khade aadmi ko bhi apni baat kahne ka pura adhikar ho, lado maksad k liye giro to bijki tarah ki pura poudha bo jao.

Dhanyabad

Krishna Kumar Shukla “ vidyarthi”

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