आत्मविश्वास

आत्मविश्वास

By | 2016-11-01T17:55:09+00:00 November 1st, 2016|Categories: कहानी, बाल कथाएँ|Tags: |0 Comments

अनुभव को मंच पर धाराप्रवाह में शुद्ध उच्चारण के साथ भाषण देते  हुए देखकर  बच्चों के साथ-साथ सभी अध्यापक भी चकित रह गए वह भी कंठस्थ? वे कोई सपना तो नहीं  देख रहे।तभी तालियों की गड़गड़ाहट ने सबकी शंका दूर कर दी।सब आपस में खुसर-फुसर करने लगे कि यह चमत्कार कैसे हो गया? जो कक्षा में तो ठीक से पढकर बोल भी नहीं सकता वह कैसे प्रतियोगिता में भाग लेकर  अपनी प्रतिभा दिखा सकता है ?
कुछ दिन पहले तक छात्रों के साथ -साथ अध्यापक भी उसके हकलाने पर मजाक उड़ाया करते थे ।जबकि वह पढ़ने-लिखने में कमजोर नहीं था ।कक्षा में अच्छे अंक लेने के कारण  उसकी गिनती दस छात्रों में की जाती थी ।लेकिन किसी वजह से अपनी बात पूरी तरह से नहीं कह पाता था। हिन्दी अध्यापक चंद्रधर जी के जाने के बाद श्रीमती सुगन्धा जी ने हिंदी अध्यापिका का पदभार संभाला ।अपने सरल व विनम्र स्वभाव  के कारण सभी बच्चों की प्यारी शिक्षिका बन गई , और बच्चे आज्ञाकारी शिष्य बन गए ।
एक बार उन्होंने कक्षा में कबीर के दोहों का गान करके भावार्थ समझाया ।तत्पश्चात क्रम से एक- के -बाद एक छात्र से उसी तरह भावार्थ करने को कहा । सभी बच्चों ने अपनी -अपनी समझ से अर्थ कर दिया ।जब अनुभव की बारी आई तो बच्चे धीरे-धीरे नीचे मूंह करके हँसने लगे जिससे वह घबरा गया । अपनी जगह खड़े -खड़े ही कांपने लगा । अध्यापिका ने सोचा शायद  अस्वस्थ होने के कारण ही अनुभव कांप रहा है । उसे बैठने के लिए कहकर  अगले बच्चे को सुनाने को कहा । सभी बच्चों को सुनने के बाद अनुभव को  अपने पास बुला लिया और  उससे  उसका नाम पूछा  और कुछ अन्य बातें की ।तभी कुछ बच्चे बीच में ही बोल पड़े , “मैम, अनुभव  अटक  -अटक कर बोलता है तभी तो सब इसे “हकला” कहते हैं ।”    ऐसा कहते ही बच्चे ठहाका लगाकर हँसने लगे ।सुगन्धा ने बच्चों को प्यार से डांट लगाई और कहा,  “बच्चो ,कभी भी किसी की कमी पर हँसना नहीं चाहिए बल्कि  उसकी मदद करनी चाहिए ।” कक्षा में चुप्पी छा गयी ।बच्चों ने माफी मांगी ।
सुगन्धा ने अनुभव को अपने पास बुलाया  और  पीठ सहलाते हुए अनुभव से पूछा ,”क्या तुम्हे मेरे द्वारा पढाया गया पाठ समझ आया या नहीं ।” अनुभव ने मूंह से कुछ न कहकर हां में सिर झुका दिया । सुगन्धा ने उसके बैग से अभ्यास पुस्तिका निकाल कर देखी तो आश्चर्य से देखती रही और बोली,”अनुभव यह तुमने लिखा है •••?इतना सुंदर लेख, कहीं कोई त्रुटि नही, शब्द मोतियों की तरह ।” सुगन्धा समझ नही पा रही थी ऐसा कार्य करने वाला बच्चा बोलने में क्यों अटकता है ।कहीं न कहीं कोई समस्या  अवश्य है ।
खेल के कालांश में सुगन्धा  अनुभव को  अपने पास बुला कर उससे बात करने की कोशिश करती।
वह सिर झुकाए हां या ना में ही जवाब देता । एक दिन प्यार से चेहरा ऊपर उठाकर सुगन्धा ने कहा, “अनुभव पहले मेरी ओर देखो,तुम्हे किसी से डरने की कोई जरूरत नही ।किसी के हँसने से तुम्हे कोई फर्क नही पड़ना चाहिए ,दूसरी बात••• जब भी किसी से कोई बात करो आँख मिलाकर बात करो।अध्यापक जो भी सवाल पूछे उसका जवाब जरूर दो ,चाहे रुक-रुक कर ही क्यों न दिया जाए ।तुम्हारी नजरे नीचे नहीं ऊपर होनी चाहिए ।इतने होनहार होकर भी तुम क्यों किसी के  उपहास का पात्र बनते हो •••?आज से मन में दृढ़ निश्चय करो कि तुम्हे कक्षा में सिर झुकाकर नही सिर उठाकर खड़े होना है । अपने  ऊपर हँसने का  अवसर किसी को भी नही दोगे ? अंदरअपने आत्मविश्वास जगाओ, तुम किसी से कम नही हो•••! “अपनी  अध्यापिका की बात अनुभव के अन्तर्मन पर  अपना प्रभाव छोड़ गई।
अगले दिन से सुगन्धा कक्षा में सबसे पहले  अनुभव को ही पाठ पठन के लिए खड़ा करती।हर रोज के अभ्यास  से धीरे-धीरे  उसकी हकलाहट कम होने लगी।अब अन्य  अध्यापक भी उससे बात करने लगे ।आत्मविश्वास के कारण ही भाषण प्रतियोगिता में भाग  लेकर विजेता बना।पुरस्कार प्राप्त करके वह फूला नही समा रहा था, पुरस्कार लेकर वह सुगन्धा जी के चरण स्पर्श करते हुए बोला ,”मैम इस पुरस्कार पर  पहला अधिकार आपका है,अन्यथा मैं तो कभी  ऐसा करना तो बहुत दूर ,सोच भी नही सकता था ।इसका सारा श्रेय आपको जाता है।” सुगन्धा  जी ने कहा,
“नही   अनुभव, यह सब तुम्हारी मेहनत व लगन का परिणाम है । मैंने तो सिर्फ अपना कर्तव्य निभाया है,तुम्हारे सोए हुए आत्मविश्वास को  जगाया है, जो हम सब अध्यापकों का कर्तव्य है ।” सुगन्धा ने अनुभव को हृदय से लगाते हुए कहा ,
” अनुभव तुम्हे  मुझसे वायदा करना होगा कि आज के बाद अपने आत्मविश्वास को  सोने नही दोगे । आज तुम्हारी छिपी हुई प्रतिभा को देख कर हम सभी  अध्यापक बहुत खुश हैं ।” आशीर्वाद देते हुए सभी  अध्यापकों ने  उसे गले लगाया ।तभी विद्यालय की प्राचार्य महोदया का उद्बोधन शुरू हुआ  उन्होंने कहा, ” आज हमारे देश को ऐसे ही अध्यापकों की आवश्यकता है जो आने वाले कल के भविष्य को संवार सकें ।” पुनः सभा में करतल ध्वनि गूंज उठी । अनुभव को सभी बधाई देने लगे ।

— सुरेखा शर्मा

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