समन्दर के पास बिताए कुछ लम्हे

समन्दर के पास बिताए कुछ लम्हे

By | 2016-12-04T00:16:39+00:00 December 4th, 2016|Categories: संस्मरण|0 Comments

ये यादें  16-4-2007 की हैं । जब एक खास मौका था , गुजरात घुमने का।जाना तो मेरी बड़ी दीदी ने था। लेकिन Exam  उसी तारीख  को होने की वजह से वो इस मौके को खो बैठी  और मुझे ये मौका दिया। मैंने मना किया ।फिर भी दीदी ने मेरी तैयारी करवा दी ।  10 -11तारीख सफर में । 12तारीख शाम को हम सभी लोग कम से कम 20 -25 लोगों का समूह था।सभी शाम के समय दमन- दीव वाला समन्दर देखने गये। समन्दर काफी दूर तक सूखा हुआ था।पत्थरों से भरा था।

सभी लोग  उन पत्थरों तक गये  फिर वापिस आ गये, नारियल पानी का मजा ले रहे थे तो कुछ ऊंट की सवारी कर रहे थे ।पर मेरा मन बुरा महसूस कर रहा था क्योंकि इन हसीन वादियों में आकर भी दूर थे । हमारे लिए वहां जाना आसान नहीं फिर हमारी मासी जी की बहु यानी भाभी जी ने मेरे मन की बात समझी और मुझे समन्दर की हसीन लहरों के पास ले गयी । कुछ दूर जाकर जब हमने पीछे देखा तो हम हैरान रह गये जो लोग समन्दर किनारे बैठे थे ,बच्चे बूढढे जवान  सभी हमारे पीछे आ रहे थे।दिल सबका करता है जाने का अपनी इच्छाएँ पूरी  करने का।बस कोई भी आगे कदम नहीं बढ़ाना चाहता |अगर  कोई और आगे बढ़े   तो बातें बनाते हैं ,और नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं ।

अमीर गरीब गोरा काला दिल सब में एक जैसा होता है। आज भी भाभी जी और भगवान जी की शुकरगुजार हूँ ।जो मेरी इच्छा पूरी हुई।समन्दर का नजारा ऐसा था कि कही ऊंचा पहाङ तो कहीं  गढढे । जैसा भी था अच्छा था।जैसे – जैसे दिन ढल रहा था पानी बढ रहा था।  ढलता हुआ सूरज ऐसा लग रहा था मानो समन्दर में और भी प्यारा लग रहा था।पापा जी हमारे साथ नहीं आये वो वहीं किनारे के पास बने  कुर्सी  पर बैठ गये ।

उस पल का नजारा भी क्या खूब होता है।सच में भगवान जी ने कितनी सुन्दर दुनिया बनाई है।लहरों का लहराना  ,लहरों की आवाज कितनी सुन्दरता लाती है उस वातावरण में।ऊंचे नीचे पत्थर ,समन्दर का वो खारा पानी। जब समन्दर केपास गये थे तो पानी किनारे से काफी दूर था। वही बहुत जल्दी बढ रहा था ।थोङी देर ही रूके थे और पानी बढने लगा,सब लोग जल्दी किनारे की तरफ चल पङे।

समन्दर में बहुत सारे शंख थे। मैंने 2-4शंख लिए तब भैया ने बताया कि ध्यान से इनमें कीङे भी होते हैं। तब मैने शंख निकाल कर  फैक दिये। बिना कीङे वाला 1शंख ले लिया।सच में वो हसीन पल मेरी जिंदगी के यादगार पल हैं ।जो मुझे हमेशा याद रहेंगें।

16-4-2007 को हम सब जम्फर बीच
(समन्दर) की तरफ घुमने गये, यहाँ का नजारा कुछ अलग था।यहाँ लहरें बिल्कुल शांत थी।पानी बस पैरों तक था ,ऐसा लग रहा था जैसे फर्श पर चल रहे हों। हर कोई उन सुन्दर नजारों को जी रहा था महसूस कर रहा था।
शाम के समय ढलता सूरज ऐसे था जैसे समन्दर में डूब रहा हो ।सूरज की लाल किरणें समन्दर के पानी में बङी सुन्दर लग रही थी।

पहले गुजरात जाने का मन नहीं था। वहाँ कुछ दिन रहने के बाद आने का मन नही था । वो एक सप्ताह मेरी जिंदगी का खास लम्हा बन गये। 17 तारीख को हम हरियाणा के लिए रवाना हो गये ।

और ये पल मेरे लिए यादगार बन गये ।

Thanks to God & Thank you Didi
I love God & my family.

समन्दर के पास कुछ पल बिताना सच में बहुत अच्छा लम्हा व एक अच्छा अनुभव  व मेरा प्यारा  अहसास था | ■

– ” वीना  मैहता (नीरू मैहता ) ”

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