देखो इन्हें ये है ओस की बूंदे

देखो इन्हें ये है ओस की बूंदे

By | 2017-02-20T12:37:06+00:00 February 19th, 2017|Categories: संस्मरण|Tags: |0 Comments

#पिंगलवाड़ा (अमृतसर)
पिंगल का अर्थ है–(#अनाथ_अपाहिज_बुद्धिहीन)
वाड़ा…………(#बच्चे)

साईकल यात्रा के 7वें दिन,जब हम पिंगलवाड़ा में पहोंचे थे…

अंदर का जो दृश्य था उसे देख बस..आंखे ही #नम हो रही थी। वहा वो बच्चे थे जिनका मानसिक संतुलन सही नही था ,अंग से अपाहिज ,नेत्रहीन ।
ये सभी बच्चे अपने माता-पिता के ठुकराये हुए बच्चे थे।

हम उनके साथ बैठे बात की..उनके कहने पर नाचे ,उन्हें कई गाने सुनाए..उनका बार-बार हमे #वीरजी ,#परजाई_जी कहना ..मानो हमे कितने सालो से जानते हों हमारा उनसे कोई दिल का रिश्ता हो।

वीरजी अपनी छोटी बहन के लिए क्या लाए?
आप यही रहोगे ना ….कुछ ऐसे सवाल मेरे दिल और दिमाग को तोड़ते चले जा रहे थे…आँख से आंसू घण्टो तक रुके ही नही…
में बार-बार आंसू छुपाने के लिए ,मुँह धोकर आता और फिर उनको देख, अपने आपको उनकी जगह रख..फिर अपनी आँखे नम कर लेता।

में अकेला नही था इस प्रक्रिया में , शामिल सभी थे..
कुछ ने एकांत में जाकर रुमाल से आँखे संभाली थी।

उनका हमे जाने से रोकना वीरजी,परजाई जी कहना
हमे वहा से जाने से रोक भी रहा था।

में उस दुनिया से होकर आया हूँ.. जहा देंने को कुछ पैसे ही थे मेरे पास लेकिन में जो चीज़ वहा से सीख के आया हु..वो मुझे एक नई राह-पे ले जायगी मुझे..सोचने के लिए तो बहुत कुछ है इस दुनिया में लेकिन कुछ लोग ही होते है जो दूसरे के लिए सोचते है….पिंगलवाडा में घुसने से पहले में उन लोगों में शामिल था..जो अपने और सिर्फ अपने बारे में सोचते है.. लेकिन अब बात अलग है।

मेरे लिए #साईकल_शांति_यात्रा_एक_Education_trip_रहा
जिनसे मेरी सोच को बहुत बदल दिया है।

– शम्भू अमलवासी

Comments

comments

No votes yet.
Please wait...
Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

About the Author:

Leave A Comment