ऐ धरा ऐ आस्मां देख हम जिए जा रहे

ऐ धरा ऐ आस्मां देख हम जिए जा रहे

By | 2017-03-17T09:42:42+00:00 March 17th, 2017|Categories: कविता|4 Comments

ऐ धरा ऐ आस्मां देख हम जिए जा रहे,

है जीवन मैं किसी एक शख्स की कमी और उसकी यादों के घूंट पिए जा रहे,

अंतर्मन से है बहुत दुखी, पर सब को खुश है बहुत दिखाए जा रहे,

ऐ धरा ऐ आस्मां देख हम जिए जा रहे,

 

याद करते करते किसी और ही दुनिया में समाये जा रहे ना है किसी से कोई गिला ना सिकवा फिर भी

अपने आप से शिकायत किये जा रहे ,

ऐ धरा ऐ आस्मां देख हम जिए जा रहे,

 

जो हुआ वो अपने बस में तो नहीं था ,

पर हो हुआ वो कैसे हुआ बस यही कहे जा रहे ,

पर शायद ये होना ही था फिर अपने आप को समझाए जा रहे

ऐ धरा ऐ आस्मां देख हम जिए जा रहे,

 

ये दर्द भी है ऐसा कि ना बताये जा रहे,

ना रुलाये जा रहे ना हँसाये जा रहे .

ऐ धरा ऐ आस्मां देख हम जिए जा रहे,

— बिनीता

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4 Comments

  1. कल्पना भट्ट March 17, 2017 at 10:07 am

    Badhiya Rachna

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  2. bini kumari March 18, 2017 at 7:29 pm

    हार्दिक धन्यवाद …………

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  3. atulya March 20, 2017 at 4:46 pm

    nice lines…..

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  4. जेपी हंस April 2, 2017 at 9:31 pm

    दर्द भरी यादें, तारीफ के काबिल…

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