राही

राही

By | 2017-04-01T22:45:27+00:00 April 1st, 2017|Categories: कविता|Tags: |0 Comments

ऐ राही यू ना बडबडाओ,
अकेले अपने आप से
विफलता के डर को
दूर भगाओ अपने आप से,
न रूको, न थको
तुम अपने काम से,
बस ईमानदारी बनाये रखो
सदा तुम अपने आप से,,
न सोचो कोई क्या कहेगा
इंतजार न करो
वक्त का,
वक्त न रूका था और न रूकेगा,
न ठहरो यू हताश होकर
हार न मानो आखिरी साँस तक,
प्रकृति की निरन्तरता
बढते पौधों का विकासक्रम
देता है जीने का सबब,
ऐ राही यू न बुदबुदाओं
अकेले अपने आप से,
पंख न काटों अपनी ख्वाहिशों के,
उडने दो तेज हवाओं संग
बूझने न दो इस मशाल को,
आया क्यूँ न तुफान हो
बो कर “उम्मीद “का एक बीज
शुरूआत करो नये कल की,,,,
ये तारे, चाँद सितारे मिलकर
गायेंगे जब मधुर गीत
महकायेगी मुस्कायेगी जब
सफलता की नई जीत
ऐ राही यू न बुदबुदाओं
अकेले अपने आप से…….

— हेमलता रावल

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