छोटे छोटे कदम

छोटे छोटे कदम

By | 2017-04-23T15:48:03+00:00 April 23rd, 2017|Categories: विचार|0 Comments

हम भारतीय हैं, हमारी पहचान आज यही है हम हारते नहीं किसी भी स्थिति और परिस्थिति में …

या तो हम दुश्मन बदल लेते हैं … या दुश्मनी छोड़ देते हैं … लेकिन हारते कभी नहीं …

आपका ध्यान कुछ महीने पुरानी घटना की तरफ लाना चाहूँगा … दिवाली का वक़्त था … अचानक से हम भारतीयों को बोध हुआ हमारा पड़ोसी देश “चीन” हमारे साथ प्रेमवत सम्बन्ध नहीं रख रहा … फिर क्या था … निकाल ली हमने अपनी हथियारें … खूब डंका बजाया … चीनी सामानों का बहिष्कार शुरू हो गया पुरे भारत भर में … सब एक जुट हो गए … लगने लगा एक क्रांति का आगाज़ हो गया है … अब वो डर जायेगा … टेक देगा अपने घुटने और हमारी जीत होगी …

हमारे कुछ परिचितों ने भी बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया … कुछ प्रत्यक्ष तो कुछ परोक्ष रूप से अपनी अपनी हिस्सेदारी निभायी … सब शामिल थे … मैं भी परोक्ष रूप से शामिल था … उत्सुकता थी भारत के अच्छे भविष्य निर्माण की …

मेरी नींद तब टूटी … जब ज्ञात हुआ … चीनी कंपनियों (खासकर मोबाइल कंपनी) का भारत में मुनाफ़ा दिन दुनी रात चौगनी होती जा रही है … फिर मैंने ढूँढना शुरु किया … क्या कुछ अभी दुश्मनी निभा रहे हैं या भूल गए … भूल ही गए होंगे … उनके मुनाफे और व्यापार के आंकड़े तो यही दर्शाते हैं …

मैंने गौर किया तो पाया कि हमने दुश्मनी छोड़ दी है … और करें भी क्यों हम शान्ति प्रिय लोग हैं … हमें भला किसी से दुश्मनी का क्या सरोकार … और वैसे भी हमारे पास विचार के लिए कई अहम् मुद्दे हैं … राज्यों के चुनाव … टीवी के कार्यक्रम … नेताओं और अभिनेताओं के प्रति प्रेम और आक्रोश दिखाने के लिए भी तो वक़्त आखिर चाहिए ही …

भाई! सबको २४ घंटे ही मिलते हैं … एक ही वक़्त में हम सब कुछ आखिर कैसे कर सकते हैं … हम कोई विरले थोड़े ही हैं ..

चलो फिर से जब चीन कुछ ऐसा करेगा बोलेगा … फिर से पटक देंगे उसके सामानों को … आखिर हम कोई बुझदिल थोड़े ही हैं … और कसम है इस बार पिछली बार की तरह न होगा … इस बार सबक सीखा ही देंगे … वैसे डर तो चीन पिछली बार भी गया था … सरकार ने साथ दिया होता तो पिछली बार भी स्थिति बादल देते …

लेकिन ऐसा कुछ नहीं होने वाला है … और जानते भी सब हैं … स्थिति तब गंभीर हो जाती है … हम सब जानते हुए भी हर बार नौटंकी करते हैं … फिर किसी दुसरे नाटक का पात्र बनने के लिए … पहले नाटक से स्तीफा दे देते हैं ….

फिर कुछ वक़्त बाद लगता है … बेवजह ही सब कुछ हुआ … यह तो सरकार का काम है … और कम से कम मेरा तो काम नहीं ही है … मैं इतने छोटे स्तर पर कर भी क्या सकता हूँ …

मित्रों! क्या पता फिर इस देश में कब गाँधी जी आयें … जिनके कहने पर पूरा भारत एक जुट होकर बहिष्कार करें … शायद गाँधी जी के इंतज़ार में बहुत देर न हो जाए …

जाग जाओ… क्योंकि जब जाग जाओगे … यकीन करें … हर बार नाटक न करना होगा … भारत एक बार पुनः अपनी प्रतिष्ठा पा लेगा …

छोटे छोटे कदम उठाएँ … बड़े कदम आपको बोझिल कर सकता है आप टूट सकते हैं … और वापस उसी स्थति में आ जाएँगे … जैसे चीनी पटाखों का बहिष्कार वाला प्रयोग बेकार चला गया … यक़ीनन अगली दिवाली कुछ ऐसा नहीं होने वाला है …

छोटे छोटे कदम जो भारत को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर सुदृढ़ बना सकें … फिर दुनिया को कोई देश आपकी तरह बुरी नज़र से देख भी न पायेगा … फिर न तो आपको किसी से दुश्मनी की जरुरत पड़ेगी न ही किसी के बहिष्कार की … सब आपके नियम और शर्तों पर आपसे व्यापार करेंगे …

कुछ कदम प्रगति के लिए …

वैसे तो छोटे छोटे कदम सबकों मालूम है … फिर भी अपने ज्ञान के हिसाब से कुछ का उलेख मैं करने की कोशिश कर रहा हूँ …

  1. गन्दगी न फैलाएं … न घर में, न ही बाहर … ( सफाई का खर्च कम हो जायेगा )
  2. वायु शुद्ध रखने में अपनी हर संभव योगदान दें ( नहीं तो जल्दी ही देश में Air Purifier बेचने वाली कम्पनियाँ आपके देश से ढेर सारा पैसा इस सामान को बेच के अपने यहाँ ले जाएँगी )
  3. देशी सामान को ज्यादा से ज्यादा उपयोग में लाएँ, विज्ञापनों पर न जाएँ … उनका काम है हर वस्तु के तारीफ करके पैसे कमाने की… जो घर में बना बेसन और हल्दी का उबटन कर सकता है … वो दुनिया की कोई क्रीम नहीं कर सकती … वो खुद भी तो विज्ञापन में बताते हैं … इसमें हल्दी है, चन्दन है आदि … )
  4. प्लास्टिक का प्रयोग हो सके हो बंद कर दें अथवा कम कर दें … यह एक ऐसा कचरा है … जो मिटटी, पानी और वायु को लम्बी अवधि तक प्रदूषित करता है … और जल्दी से गलत भी नहीं …
  5. बिजली को आवश्यकता अनुसार सदुपयोग करें … यक़ीनन आप बिल भर सकते हैं … आपके पास बहुत पैसे हैं … लेकिन संसाधन कम हैं
  6. खाना न फेकें … आप अपनी आय के हिसाब से कुछ भी खरीद और फेक सकते हैं… लेकिन संसाधन की कमी बहुत बड़ी नुकसान पहुँचती है … आर्थिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार करती है …
  7. जिनसे संभव हो … भारत में छोटे छोटे वस्तुओं को निर्माण करें …
  8. लोग सस्ते खिलोने के चक्कर में … प्लास्टिक कचरा जमा न करें … बिना खिलौने अथवा कम खिलौने से भी बच्चों को बहलाया जा सकता है … बच्चों के साथ वक़्त गुजारें …

और भी बहुत कुछ हो सकते हैं… स्वविवेक का प्रयोग करें … अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए अच्छे पैसे तो कमा के छोड़ जाएँगे … एक अच्छा समाज भी दें … एक सशक्त देश भी दें …

धन्यवाद !

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