आध्यात्मिकता का ढोंग

आध्यात्मिकता का ढोंग

भारत की चेतना सदैव आध्यत्मिक रही है ।मैं स्वयं भी बहुत आध्यात्मिक हूँ पर उस अर्थ में नहीं जिस अर्थ में आध्यात्मिकता का सामान्य अर्थ लिया जाता है ।कर्मकांड ,बाबाओं ,गुरुओं के पास जाना –ये सब मेरी आध्यात्मिकता के खांचे में फिट नहीं होता ।
विवाह के पश्चात मेरा सामना एक ढोंगी बाबा की आध्यात्मिकता से हुआ , उसी सन्दर्भ में ये संस्मरण है ।मेरा परिवार एक बाबा जी का बहुत बड़ा भक्त था । मुझसे भी अपेक्षा रखी गयी की उन्हें आराध्य मानूँ ।पति मुझे उनके आश्रम लेकर गए । ट्रेन से उतर कर हमने आश्रम जाने के लिए टैक्सी की ।रास्ते में टैक्सी वाले ने ही बाबा जी की पोल खोलनी शुरू की —किस प्रकार बाबा के आदमी लोगों की जमीनों पर कब्ज़ा करते है ।कोई आराम से मान जाये तो ठीक ,नहीं धोखा , गुंडागर्दी सभी तिकड़म लगायी जाती है ।मैंने पति की ओर देखा ,उनका विश्वास अब भी अडिग था।
आश्रम पहुंचे । वहां बाबा जी का सत्संग चल रहा था। बाबा जी प्रवचन दे रहे थे —–जीवन नश्वर है , मृत्यु का समय निश्चित है , भौतिक पदार्थों का मोह त्याग दो ,शरीर तो एक दिन नष्ट हो जाना है ।
आदि आदि ।सत्संग के बाद बाबा जी ने भक्तों के प्रश्नों के उतर दिए ।जयजयकार हुई ।
बाबा जी उठे ।उनके दोनों और दो – दो ब्लैक कैट कमांडो थे ।पूरी सुरक्षा ।बुलेट प्रूफ विदेशी गाड़ी आयी और बाबा जी ने अपने आलिशान बंगले की ओर प्रस्थान किया ।वो बंगला सारी भौतिक वस्तुओं ,सुविधाओं से लैस था । आश्रम से कुछ दूर था ।
अगले दिन फिर सत्संग हुआ ।वही पहले दिन वाले प्रवचन की बातें दुहरायी गईं । सत्संग के बाद प्रश्न पूछने की बारी आयी ।मैँ निश्चय कर चुकी थी —-आज बाबा जी को निरुत्तर करना है ।
मैंने कहा —,बाबा जी ,आप कहते हो –जीवन नश्वर है ,मृत्यु अटल है , भौतिक वस्तुओं का त्याग करो ,शरीर तो नष्ट हो जाना है आदि आदि ।………..फिर आपकी मृत्यु भी तो अटल है ” आपको ये कमांडो सुरक्षा क्यों चाहिए , आलिशान बंगले की भौतिकता क्यों चाहिए ? , जीवन नश्वर है ! तो फिर ये बुलेट प्रूफ गाड़ी क्यों ? किसका डर है आपको ?” …………..
बाबा जी बगले झांक रहे थे ।उनके भक्त मुझे घूर रहे थे । मैंने पति की ओर देखा ।हम उठे और वापिस आ गए ।मेरा परिवार ढोंगी बाबा की आध्यात्मिकता के ढोंग से मुक्त हो चुका था ।

— डॉ संगीता गांधी
नई दिल्ली

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