दे जन्मदात्री

दे जन्मदात्री

By | 2017-05-11T23:57:26+00:00 May 11th, 2017|Categories: कविता|Tags: |0 Comments

दे जन्मदात्री! जननी सदा,
करूँ चरण पूजा तेरी।
जग में जन्म दिया तुमने,
किया उचित पालन मेरी।।

पकड़ हाथ चलना सिखलाती,
सिखलायी मीठी बोली।
हे जन्मदात्री! जननी सदा,
करूँ चरण पूजा तेरी।।

धूप छाँव से हमें बचाया,
पग- पग चलना सिखलायी।
पिता ड़ाटते जब भी मुझको,
तुमने ही हमें बचायी।।

पढ़ना- लिखना मात सिखाती,
सिखलाती बढ़ना आगे।
हुआ कष्ट जब भी मुझको,
पहले सबसे माँ आयी।।

अपने सुत के कष्टों को माँ,
सच ही भूल नही पाती।
अपनी हाथों से दूर करें,
जब भी सुत पर दुख आती।।

बचपन की नादानी को माँ,
हँस कर वह भूला देती।।
बेटे की हर इच्छा देखो,
कैसे उसे पता होती ।।

माँ की ममता की खातिर,
देव भी अवतरित होते।
उनकी गोदी में खेल- खेल,
वे सदा प्रफुल्लित होते।।

सच में माँ महान होती हैं,
सुत के कष्टों में रोती।

-राकेश यादव

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