मेरे साथ 

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मेरे साथ 

By | 2017-05-13T08:51:54+00:00 May 12th, 2017|Categories: कविता|0 Comments

जब योवन पर आती
नदियाँ
मछलियाँ तब नदी के प्रवाह के
विपरीत प्रवाह पर तेरती
छोटी -छोटी धाराओं पर
चढ़ जाती सीधे

नदियाँ मिलना चाहती
समुद्र से
मछलियाँ देखना चाहती
नदियों का उद्गम

सागर से मिलती जब नदियाँ
लाती साथ में कूड़ा करकट
सागर को बताने
ऐसे हो जाती है दूषित
प्रदूषण फेलाने वालों इंसानों से

जल को स्वच्छ बनाने के लिए
बहकर /कहकर जाती नदियाँ
मछलियों से
बस तुम ही तो हो
मुझे स्वच्छ बनाने वाली और
तुम्हारे सहारे ही
मै  रहूंगी भी कुछ समय जीवित

तब तक
जब तक तुम रहोगी मेरे जल में
मेरे साथ

संजय वर्मा “दृष्टि “

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