मैं रिटायर हो गया हूँ

मैं रिटायर हो गया हूँ

By | 2017-05-14T22:02:27+00:00 May 14th, 2017|Categories: आलोचना, कविता|0 Comments

 

मैं रिटायर हो गया हूँ ,

हाँ मैं रिटायर हो गया हूँ .

जिस मैच का मैं कप्तान था ,

आज उसी का अम्पायर हो गया हूँ ,

मैं रिटायर हो गया हूँ ,

चलती थी जो गाडी मेरे ही दम पर ,

आज उसीका पांचवां टायर हो गया हूँ

मैं रिटायर हो गया हूँ ,

सब्जी- दूध लाने वाला ,बच्चों को बहलाने वाला

मनो अपने ही परिवार द्वारा हायर हो गया हूँ ,

मैं रिटायर हो गया हूँ .

अपने होने की तपिश से पिघलता था दिलों को ,

आज फकत बुझती हुई फायर हो गया हूँ  .

मैं रिटायर हो गया हूँ .

न जाने रहूँगा कब तक लंबित ,

उपरवाले की अदालत में मुकदद्मे सा दायर हो गया हूँ.

मैं रिटायर हो गया हूँ …..

— मंजु सिंह

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About the Author:

बीस वर्षों तक हिन्दी अध्यापन किया । अध्यापन के साथ शौकिया तौर पर थोडा बहुत लेखन कार्य भी करती रही । उझे सामजिक और पारिवारिक इश्यों पर कविता कहानी लेख आदि लिखना बेहद पसन्द है।

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