एक दियां जला रखा हैं तूफान के आगे

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एक दियां जला रखा हैं तूफान के आगे

By | 2017-05-29T16:34:37+00:00 May 29th, 2017|Categories: कविता|5 Comments

हैवान बन जाते हो किसी इंसान के आगे
कुछ और सोचो हिन्दू मुसलमान के आगे
हमे मत सिखाओ ये पाठ राष्ट्रभक्ति का
हमारी जान भी सस्ती हैं हिंदुस्तान के आगे
ये कुर्सियां तुम्हे खाने को रोटी नही देंगी
कल हाथ फैलाओगे तुम किसान के आगे
हाँ चोर है वो जालिम जरूर कत्ल कर देना
कल रोटियां चुराएगा किसी दुकान के आगे
अब कब्र में भी चैन से ये सोने नही देंगे
बस्तियां बना रहे हैं कब्रिस्तान के आगे
खूब आंधिया चलाओ बवंडर पैदा करो
एक दियां जला रखा हैं तूफान के आगे

– देवानन्द शर्मा

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5 Comments

  1. hindilekhak May 29, 2017 at 4:36 pm

    बहुत ही सुन्दर रचना …

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  2. अमित कुमार May 30, 2017 at 3:12 am

    सुंदर रचना लाजबाब

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  3. Kiran May 30, 2017 at 3:13 am

    So nice dev sharma ji

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  4. महिमा शर्मा May 30, 2017 at 10:23 am

    बहुत उम्दा

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  5. अभिषेक गुप्ता May 30, 2017 at 10:24 am

    आपकी लेखनी को सलाम

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