अतीत के चित्र

अतीत के चित्र

By | 2017-06-04T11:02:03+00:00 June 4th, 2017|Categories: लघुकथा|0 Comments

नेहा भागे भागे घर के भीतर आती है।उसकी सांसे मानो रेल कि इंजन कि तरह धड़ धड़ कर धड़क रही थी । घर आते ही उसने दरवाजा धडाम से बंद कर लिया और गुमसुम सी अधमरी से बैठ कर मन ही मन संघर्ष करने लगी अपने आप से “नहीं वो वही था! हाँ वही तो था । मेरी आँखें उन्हें पहचानने में भूल नहीं कर सकती।बिल्कुल नहीं !वो इतने सालो बाद फ़िर इस शहर में क्यों आया?क्यों मेरे जख्मों को हरा करने के लिये वो यहाँ आया।मैंने उसके फैसले को स्वीकार कर लिया था।उन्ही के निर्णय ने ही मेरी जिंदगी को एक नये मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया था ।फ़िर क्यों वो मुझे जीने नहीं दें रहा ?क्यों ?”रोहन को देखते ही नेहा फ़िर पुरानी यादों में खो जाती है..जब वो कॉलेज के तीसरी वर्ष कि पढ़ाई पूरी कर के आखिरी बार रोहन से मिली थी। इस तीन वर्षों में नेहा रोहन के इतने करीब आ गई थी कि अंत में उसने अपने मन कि बात रोहन को बताये बिना रह ना सकी । परंतु रोहन ने उसके इस भावना को अपमानित करके अपनी प्रेमिका किसी और को बताया। यह सुनकर नेहा के सारे अरमान ताश के बने महलों सा ढह गया ।उसके बाद नेहा ने कभी रोहन से मिलने या बात करने कि कोशिश नहीं की और उसकी जिंदगी से दूर कलकता चली आई। यहाँ आकर उसे  रोहन के बारे उसी की एक सहेली से पता चला की जिस प्रेमिका के लिये रोहन ने उसे ठुकुरा दिया था। उसने सिर्फ नेहा से बदला लेने के लिये रोहन से प्रेम का दिखावा किये था क्योंकि नेहा पढ़ाई में उससे हर प्रतियोगिता में आगे थी ।अब रोहन को अपने किये पर पछतावा हो रहा है और वो नेहा को ढूँढ़ रहा है।ताकि वो उससे माफी माँगकर उसे अपना सके।

नेहा अब भी रोहन को उतना ही चाहती थी पर उसकी ये चाहत सिर्फ उससे दूर रहकर ही जिंदा थी क्योंकि जिसे रोहन ने बड़ी ही बेरहमी से मार दिया था अब नेहा रोहन से दूर ही रहना चाहती थी ताकि उसका अधूरा प्रेम सदा जिंदा रह सके।

– अनुराधा

 

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