काहे न आये …..

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काहे न आये …..

By | 2017-06-28T22:26:45+00:00 June 28th, 2017|Categories: कविता|0 Comments

काहे न आये …..

भोर गए तुम
अब तक न आये
मोरे पिया कछु
समझ न पाए
राह निहारूं
मैं बावली
मोरे पिया
तुम
काहे न आये

आँगन लीपा
पनघट जा कर
जल भर लाई
चूल्हे पर
कई व्यसन बनाये
मोरे पिया
तुम
काहे न आये

भानु की रश्मियाँ
संग सांझ के
खेलन आई
आँगन अपने
नित्य काम के साथ तुम्हारा
रह रह कर मैं
पंथ निहारूं
मोरे शृंगार अब
मोहे चिढ़ायें
मोरे पिया
तुम
काहे न आये

तोरी बतियाँ
तोरी रतियाँ
याद करें तोहे
मोरी अखियां
तुम बिन मोहे
कछु न भाये
रह रह मोरे
नैन भर आये
चर अचर सब
घर लौट आये
पर
मोरे पिया
तुम
काहे न आये,काहे न आये …..

सुशील सरना

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