मेरे मेहबूब

मेरे मेहबूब

By | 2017-08-02T14:27:55+00:00 July 19th, 2017|Categories: कविता|Tags: |0 Comments

मेरे ख़्वाबों में, ख़यालों में मुस्कराते हैं,

मेरे मेहबूब हर तरफ ही नज़र आते हैं।

बनके धड़कन जो समाये हैं मेरी साँसों में,

गीत बनकर मेरे  होठों पर  गुनगुनाते हैं।

हसीं पलकों  में हसरतें  लिये उजालों की,

च़राग दिल में उम्मीदों के जगमगाते हैं।

रगों में बहते हैं  हर पल जो  रवानी बनकर,

फूल बनकर वो फिज़ाओं में बिख़र जाते हैं।

दूर होकर भी जो  दिल के करीब  रहते हैं,

भूलकर भी कभी जिनकों न भुला पाते हैं।

  

-आचार्य बलवन्त

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