विषधर (मुक्तक )

विषधर (मुक्तक )

By | 2017-07-06T13:05:50+00:00 July 6th, 2017|Categories: मुक्तक|0 Comments

हे मनुष्य !

तुमने सीख तो लिया ,

सांप से विष उगलना |

और सीख लिया ,

परायी छीन कर उसपर अधिपत्य ,

अपना  जमाना|

परन्तु तुमने उससे क्या यह सीखा ?

की वह करता नहीं कभी कमज़ोर व्

निर्दोष पर वार|

अर्थात तुम सांप से अधिक ,

विषधर हो|

 

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संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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