हाँ, मैं इश्क़ लिखता हूँ

हाँ, मैं इश्क़ लिखता हूँ

By | 2017-07-25T00:38:03+00:00 July 25th, 2017|Categories: कविता|0 Comments

बिन आसमान चाँद लिखता हूँ
बिन बादल बरसात लिखता हूँ
तुम में ख़ुद को ख़ुद में तुम्हे लिखता हूँ
हाँ, मैं इश्क़ लिखता हूँ

सूखा सावन भींगी राते
दर्द तर्पण तेरी यादे लिखता हूँ
शर्म हया सब दरकिनार कर
कहानी उस पार का लिखता हूँ
हां, मैं इश्क़ लिखता हूँ

अधूरी ख़्वाहिशें सोचती नज़र
तुम्हारें ख़्वाबों की जहां लिखता हूँ
शिकवे ख़फ़ा वफ़ा बेवफ़ा
तेरे इश्क़ का फ़साना लिखता हूँ
हाँ, मैं इश्क़ लिखता हूँ
©अनिल के राय

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