जरूरत

जरूरत

By | 2017-08-30T19:37:57+00:00 August 30th, 2017|Categories: कविता|0 Comments

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नई कविता – जरा हटके

 

जरूरत

 

केवल एक शब्द नही है

जरूरत

जड़ ,चेतन और मृत्यु से

सीधा सम्बन्ध है इसका।

 

जरूरत होती है , इन सबको –

प्यार , विश्वास और स्नेहिल रिश्तों की।

होती है विविधता , हर जरूरत में

जो देती है परिणाम भी

किये गए कर्मो के अनुरूप ही ।

 

जरूरत के लिये

सामंजस्य तो

बैठाना ही पड़ता है

जिंदगी में उन सबसे

जो होते हैं , हमारे करीब

या , जिनसे पड़ता रहता है

अक्सर ही , वास्ता हमारा

 

क्योंकि –

जब बैठाते हैं हम

जड़ , चेतन या रिश्तों में तादाम्य

होती हैं तभी पूरी

जरूरतें भी हमारी।

– देवेंन्द्र सोनी , इटारसी ।

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