अंखियन छूटा काजर

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अंखियन छूटा काजर

By | 2017-08-02T07:23:02+00:00 August 1st, 2017|Categories: गीत-ग़ज़ल|0 Comments

 

हंसी कैद घूँघट में देखो , खुशियां छलके बाहर !
हाथों में चुड़ले खनके हैं , पैरों बाजे झांझर !!

अभी बेड़ियां नहीं हैं छूटी , टूटे ना है बन्धन !
द्वार देहरी लाज है पल्लू , अंखियन छूटा काजर !!

घट पनघट हैं खेत खले हैं , चूल्हे चौके संग में !
दूध दही है माखन घी है , अगनां में हैं ढाँढर !!

खेतों की रखवाली है और, कभी डागले बैठे!
हाथों में पत्थर गोफन है , कभी उड़ाते पाखर !!

श्रम से है परहेज़ नहीं , कांधे जिम्मेदारी !
प्रभु की मेहर यहां बरसती , हम हैं निज के चाकर !!

हमने धन संतोष है पाया , बाकी सब धूसर है !!
थोड़े ही में खुश जानो हम , जितना पाया पाकर !!

आँगन शिक्षा चहक रही है , पीढ़ी अब बदलेगी !
अब विकास के द्वार खुले हैं , गीत खुशी के गाकर !!

बृज व्यास

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