इंतज़ार मत करना

इंतज़ार मत करना

By | 2017-08-04T07:44:33+00:00 August 4th, 2017|Categories: मुक्तक|2 Comments

“इंतज़ार मत करना”
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इंतज़ार मत करना
अब मेरा
थक गये हैं पाँव
मुश्किल है चलना
मोड़ अभी भी बहुत हैं
ज़िंदगी के
याद कर लेना
कभी हो सके
मेरे अक्स को।
—————————
राजेश”ललित “शर्मा
———————
बहुत दूर निकल आये
ए ज़िंदगी तुमसे
मंज़िल आ भी गई
तो मिल न पायेंगे अब
———————-
राजेश”ललित”शर्मा

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एक अध्यापक पर पिछले ४० वर्षों से लिखना,पढ़ना,राष्ट्र एवं समाज सेवा अध्यात्म चिंतन, साहित्य सेवा आदि कार्यों में संलग्न।

2 Comments

  1. दीपेश शर्मा August 8, 2017 at 9:30 pm

    इन्तजार मत करना और क्षणिका एक दूसरे से गुथी लगती हैं

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  2. दीपेश शर्मा August 8, 2017 at 9:32 pm

    अच्छी कयिताए।

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