हरकत मनमानों सी

हरकत मनमानों सी

By | 2017-08-04T23:46:38+00:00 August 4th, 2017|Categories: गीत-ग़ज़ल|0 Comments

हरकत मनमानों सी

सावन की रिमझिम बूंदों ने , प्यास बुझाई ऐसी !
हरियाली चुनरी ओढ़ी है , वसुन्धरा ने कैसी !!

तन मन हरषाये ऐसे हैं , कठिन थाह है पाना !
झूलों की पीगों में बढ़ चढ़ , लदी उमंगें ऐसी !!

लहराये गीतों के स्वर हैं , बसी हंसी अधरों पर !
आँखियों में है छवि तैरती , मनमूरत के जैसी !!

इतराया सा मौसम लगता , धरा गगन सब झूमें
कांधे पर चढ़कर बैठी हो , लदी बहारें ऐसी !!

डूब रहें हैं जलधारे में , हाहाकार मचा है !
मचल रहे हैं सागर नदिया , लहरें तूफानों सी !!

भीगा भीगा जग लगता है ,सब है भीगा भीगा !
बाल तरुण हर्षाये लगते , हरकत मनमानों सी!!

– बृज व्यास

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