सचमुच एक बहाना है

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सचमुच एक बहाना है

By | 2017-08-05T17:09:10+00:00 August 5th, 2017|Categories: कविता|0 Comments

” तेरा रूठना कह दे बहना –
सचमुच एक बहाना है ” !!

जिन आंखों में आंसू बसते ,
उनमें मोती सजने दे !
अपने हाथों तुझे खिलाऊँ ,
नीर न अब तू बहने दे !
इतना मत रो मेरी बबली ,
क्या मुझे रुलाना है !!

मैं हूँ अबोध तू लगे सयानी ,
यही सभी का कहना है !
है सूझ बूझ नानी दादी सी ,
तू लागे ज्यों गहना है !
जिद थोड़ी अच्छी लगती है ,
औऱ मुसीबत ढाना है !!

सीधे मुंह अब बात भी कर ले,
ज्यादह भाव नहीं खाना !
राखी अब नजदीक आ गई ,
कहीं तुझे ना पड़े मनाना !
गिफ्ट , मिठाई और क्या चाहे –
हँसकर तुझे बताना है !!

बृज व्यास

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