बढ़ती उम्र और आप

बढ़ती उम्र और आप

By | 2017-08-06T20:10:30+00:00 August 6th, 2017|Categories: विचार|0 Comments

👳बढ़ती उम्र की समस्याओं से मुक्ति, बुढ़ापा बोझ ना बने:—-

👳कुछ इस तरह मैंने जिंदगी को आसान कर लिया।
किसी से माफ़ी मांग ली,तो किसी को माफ़ कर दिया।।

👳इस उम्र में पौष्टिक भोजन,योग,व्यायाम, अनुशासित दिनचर्या, अच्छी नींद को तरजीह दें।बुुढ़ापे में नींद कम हो जाती है। इस लिए चिंता न करें। दिन में सदैव लेेेटे रहना भी  रात के लिये समस्या बन जाता है। किसी भी तरह के विशेष ज्ञान का  अर्जन अवश्य करें।

👳हम अपने शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी या तो संतुलित भोजन से पूरी कर सकते हैं, या औषधि या विटामिन्स की गोली आदि द्वारा।बेहतर तो यही है कि हम प्राकृतिक स्रोतों पर ही निर्भर रहें।इसके लिए आवश्यक है,कि वृद्धों को समझना होगा ऐसे कौन से तत्व हैं, जिससे हम स्वस्थ रह सकते हैं।कौन से खाद्य पदार्थ हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं।धूम्रपान, मद्यपान से दूरी रखें।

👳रेशेदार भोजन–पाचनतंत्र प्रणाली को दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कोलेस्ट्राल को घटाता है, ब्लड शुगर,वजन को नियंत्रित करता है।
अतः एक प्लेट मिक्स फ्रूट,सलाद,चपाती,हरीसब्जी,छिलके सहित दालें भोजन में अवश्य शामिल करें।

👳हरड़,त्रिफला,आंवला,सेव,फल,बीन्स, विटामिन सी रोजाना अवश्य लें।गरिष्ठ भोजन ना लें।प्रकृति अनुसार (वात, पित्त, कफ) भोजन करें तो अच्छा।अन्यथा परेशानी तो आपको ही होगी।

👳खनिज लवण–शरीर में इस जरूरी अवयव की पूर्ति भोजन,नमक,पानी से हो जाती है।

👳कैल्शियम–इसकी कमी से हड्डी रोग की समस्या उत्पन्न होती है।शक्तिवर्धक है, क्षमता को बढ़ाता है।हृदयगति को नियंत्रित करता है।कोलेस्ट्रॉल घटाता है, नर्वस सिस्टम के लिए लाभदायक है। इस कमी को दूध व दूध से बनी चीजें, दाल,सोयाबीन,हरीसब्जी, रसदार फल,सूखेमेवों द्वारा दूर किया जा सकता है।

👳केवल उम्र को बुढ़ापा न माने, अगर शरीर स्वस्थ है तो गाय, कुत्ते, परिंदों,किसी जरूरतमन्द की सेवा अवश्य करें।सेवा का लक्ष्य अवश्य लें, मन से करें, मात्र धन से या दिखावे के लिए नहीं।हर समय स्वयं की सेवा करवाने की ना सोचें।आप अगर अच्छे स्वस्थ हैं, और किसी को आपकी शारीरिक सहयोग की आवश्यकता है तो परहेज क्यों?

👳तुलसी, पीपल,नीम आदि वृक्ष लगाएं तथा इनके सान्निध्य में रहें।प्रकृति से प्रेम करें।अभी तक आपने जो पाया है, वह समाज को लौटाने का वक्त है। प्रेम, सेवा,अनुभव,धन द्वारा किसी भी रूप में जरूरतमंद की सहायता करें।घर में भी बागवानी कर सकते हैं, आपकी सोच भी सकारात्मक होगी तथा व्यस्त भी रहेंगे।

👳जिम्मेदारी के साथ मोह कम करते जाइये,नहीं तो लालची बना देगा आपको।अपेक्षाएं किसी से भी न रखें।दूसरों की आलोचना न करें।माफ़ करना भी सीखें।हर समय दूसरों पर निर्भरता, अनावश्यक दखल से दूरी रखें।

👳इस उम्र में नींद भी कम हो जाती है, शारीरिक थकान भी नहीं होती, अतःस्वयं व्यस्त रहें, न कि बच्चों को अनावश्यक परेशान करें।जिंदगी को सरल और सहज बना कर रखें।यथा सम्भव अपने कार्य स्वयं करने की कोशिश करें। अपने कार्य स्वयं करने से व्यायाम भी होगा तथा, थकान के बाद नींद भी अच्छी आएगी।

👳सबसे महत्वपूर्ण अध्यात्म को जीवन में उतारें। सुबह शाम ईष्ट आराधना अवश्य करें। सोच सकारात्मक रखें।समय रहते युवावस्था से ही अपनी आदतें सुधारें।घमंड नहीं करें, कृपया निरंकुश ना बनें।इस तरह सभी आप का आदर,सम्मान भी करेंगे तथा सहायता भी।और आप स्वयं को कभी असुरक्षित महसूस नहीं करेंगे। एकांत में प्रभु स्मरण करें, मौन को साधना सीखें।स्वाध्याय से आपका समय अच्छा व्यतीत हो सकता है, अपनी रुचि अनुसार पढ़ें।

👳समय पर चिकित्सीय सलाह लेते रहें।घर परिवार में प्रेम सदभाव बनाये रखें।धन को प्राथमिकता न देकर रिश्तों को दें।व्यवहार में संयम ,विचारों में खुलापन रखें।हर समय अपनी इच्छाओं को थोपें नहीं।न ही निरीह बने रहें।

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