खल नायक

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खल नायक

By | 2017-08-07T12:50:02+00:00 August 7th, 2017|Categories: कविता|0 Comments

डाट खाता हुआ

पिटता हुआ

जब बे -पर्दा होता है खलनायक

अच्छा लगता है।

कभी हम भी यही भूमिका

निभा रहे होते हैं,

असल जिंदगी मेंं

तब हम पसंद नहीं करते

कोई हमें डाॅटे,पीटे

और बे-पर्दा करे।

बल्कि ,

ऐसा करने वाले को

हम देख लेते हैं

हाथ तोड़ देते हैं

कभी -कभी तो

रुखसत कर देते हैं

इस जहाँ से

दोजख के लिए।

मोती प्रसाद साहू

अल्मोड़ा

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