मन खट्टा

मन खट्टा

By | 2017-08-09T08:19:13+00:00 August 9th, 2017|Categories: मुक्तक|0 Comments

“मन खट्टा”
—————–
मन खट्टा हो गया
चल यार
कैसी बात करता है
मन कभी मीठा हुआ
कभी सुना क्या?
नहीं न
यूँ ही जमी रहेगी दही
रिश्तों की
खटास रहेगी ही
चाहे जितना डालो चीनी
फिर मन खट्टा
हुआ तो हुआ
क्या करें?????
————————
राजेश”ललित”शर्मा

 

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एक अध्यापक पर पिछले ४० वर्षों से लिखना,पढ़ना,राष्ट्र एवं समाज सेवा अध्यात्म चिंतन, साहित्य सेवा आदि कार्यों में संलग्न।

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