किसका हित कैसी आजादी ?

किसका हित कैसी आजादी ?

By | 2017-08-17T23:27:12+00:00 August 17th, 2017|Categories: कविता|0 Comments

सँसदीय-गरिमा घायल जब,
सँसद ही नहि चल पाती है ।
फितनों की टोली मनमाने,
दुर्आचरण सिखाती है ।।
कूकुर की महिमा आह्लादी ?
किसका हित कैसी आजादी ??

आधी-आबादी के सँग जब,
नहीं हो रहा है सत्न्याय ।
नेताओं के वक्तव्यों में,
शब्द भरे हैं शर्म-विहाय ।
धर्म-धरा पर विचरत दीखे हैं उन्मादी ?
किसका हित कैसी आजादी ??

जहाँ योग्यता के पैमाने घायल हों,
शिक्षित-जन पर बरसत लाठी ।
बाजारू-अनुशासन-मन्शा,
नहीं मानते कछु-कद-काठी ।।
पद पर बैठत हिन्सावादी ?
किसका हित कैसी आजादी ??

बीच सड़क पर नाव चलेगी,
मुश्किल है राहों पर चलना ।
बलात्कार-झेलत-महिलाएँ,
जब बेमौत मर रहे ललना ।।
मनमानी की सूचक खादी ?
किसका हित कैसी आजादी ??

पँगति में लग गये दिख रहे,
सुख-सुविधा के कायल-जन ।
धन-वैभव का ढेर कमा कर,
काला-मन पर उज्ज्वल-तन ।।
दल-बदलू हम अवसर-वादी ?
किसका हित कैसी आजादी ??

“उदय”
सुशील कुमार मिश्र
सुलतानपुर-उत्तरप्रदेश

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