आजाओ माखनचोर एक बार फिर जग में

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आजाओ माखनचोर एक बार फिर जग में

By | 2017-08-17T23:17:16+00:00 August 17th, 2017|Categories: कविता|0 Comments

आ जाओ माखन चोर

एक बार फिर जग में

हाल दुष्कर है सृष्टि का

हर पल प्रतिपल में

 

मची है चीत्कार

चहुँ ओर जग में

भ्रष्टाचार व्याप्त है

यहाँ हर मन में

 

आ जाओ माखन चोर

एक बार फिर जग में

 

अराजकता, चीरहरण, भ्रष्ट आचरण

दिखता हर कूँचे सड़क पर

हर डग पर खड़ा कुशासन

रिश्ते झूठे हैं अब इस जगत में

 

दुर्योधन, दुशासन, कंस का जमाना

फिर से आ गया वही सदियों पुराना

घूंसखोरी चली है अकड़ के

न्याय है ही नहीं इस जगत में

 

आजाओ माखन चोर

एक बार फिर जग में

 

माखन-मिश्री वह टोली हठखेली

नहीं दिखती है अब मानव मन में

गौ-धन  का  बुरा यहाँ हाल है

गौ-हत्या करें , पापी जग में

 

भविष्य नौनिहालों का लगा दांव पर

बन बैठे हैं नाग कालिया हर घाट पर

एक बार कृपया कर जाओ

संसार का दुख हर ले जाओ

 

आ जाओ माखन चोर

एक बार फिर जग में

 

कौरवों का अभी भी यहाँ राज है

पांडवों का जीना दुष्वार है

सच्चा कर्म आकर सिखा जाओ

एक बार फिर मंथन कर जाओ

 

युद्धभूमि हर घर में सजी है

भाई-भाई में कटुता भरी है

अहम् अपना यहाँ सर्वस्व है

दुख दरिद्रता का राज सर्वत्र है

 

आ जाओ माखनचोर

एक बार फिर जग में

तार दो हर जन को सत्कर्म से

एक बार फिर से आकर मेरे कान्हा

पढ़ा जाओ गीता का पाठ इस जग में

 

लिया जन्म तूने इस जग में जब

छटा काली छटी थी अष्टमी पर

एक बार मेरे कान्हा आजाओ

इस सृष्टि को सँवार जाओ

 

आ जाओ माखनचोर

एक बार फिर जग में

हाल दुष्कर है सृष्टि का

हर पल प्रतिपल में

 

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MA. Political Science MA. Hindi B.ed Hindi/ Social Science MPhill. Hindi Sahitya

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