पुरानी यादें

पुरानी यादें

By | 2017-08-17T12:51:42+00:00 August 17th, 2017|Categories: कहानी|0 Comments

बार बार दर्पण देखती हूँ मुंह मोड़ लेती हूँ
मन मुड़कर देखता मेरा दिल रोकता मेरा

कह नहीं सकते हम कुछ अफसाने ऐसे हैं
सोचती भी हूँ अगर अक्स में अश्रु आते हैं

कभी कहता मन मेरा पुरानी सोच न रखो
माफ कर दो उन्हें जिन्होंने दिल दुखाया था

कांटे बोये थे कभी तेरी चलती हुई राह में
कांटे हट गए हैं अब तक तेरी राह से

डरावनी हवाओं की दस्तक मिला करती थीं
दिशाएँ बदल चुकी हैं अब उन हवाओं की

काली परछाईयां आके डराती थी कभी
नामोनिशान मिट चुका है जिन्दगी से मेरी

बार बार दर्पण देखती हूँ मुंह मोड़ लेती हूँ
मन मुड़कर देखता मेरा दिल रोकता मेरा

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