आँचल

आँचल

By | 2017-08-17T22:50:46+00:00 August 17th, 2017|Categories: कविता|0 Comments

हे पट के नन्हे से कोने !

तेरी महिमा है आपार .

संसार के सारे आश्रयों का,

तुझमें छुपा है सार .

ईश्वर का  वरदान बन,

धरती को तपन से बचाए.

कभी माँ की ममता /स्नेह बनकर ,

हर दुःख /कष्ट से छुपाये.

और  मनुष्य के अंतिम क्षण में भी ,

मुक्ति  का सुख भी प्रदान कर जाये.

मुक्ति जीवन-मरण से ,

मुक्ति  सांसारिक कष्टों से ,

अस्थायी -दुःख-सुख से ,

तू  चिर -विश्राम दिलवाए.

निसंदेह तुझी में छुपा है , अथाह,प्रेम,विश्वास ,

और सच्चे सुख का  सार.

है तो तू वस्त्र का नन्हा सा टुकड़ा ,

मगर तू है मनुष्य जीवन का आधार.

 

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संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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