इंसानियत

इंसानियत

By | 2017-09-30T21:14:31+00:00 September 30th, 2017|Categories: लघुकथा|0 Comments

इंसानियत

 

रश्मि अपने ऑफिस के लिए निकली ही थी . गेट पर एक बीस बाइस  साल की  भिखारिन ने रास्ता रोक लिया अपने भूखे बच्चे की दुहाई देते हुए.यों तो वह भीख देने के खिलाफ ही रहती पर बच्चे को देख उसे दया आती इससे  पहले ही उसे आश्चर्य हुआ कि बच्चे की शक्ल सूरत,रंग रूप  से वह इस भिखारिन का अपना बच्चा हो.मैले कुचैले कपड़ों में भी अंदाज़ा  हो सकता था .रश्मि को लगा कहीं से चुराया न हो.पूछ बैठी …..

‘’अच्छी भली तो हो कुछ काम करो भीख क्यों ?’’

‘’बीबी जी काम कौन दे हमको ?’’

बच्चे का पिता कमाता नहीं ?किसका है ये ?

चुराया है क्या ?पुलिस को बुलाऊँ ?बच्चे को लेकर भीख माँगना ..क्या है ये सब ?

धमकाते हुए बोली .

‘’गलती हुई बीबी जी आपसे मिलकर .मैं तो रोज मंदिर में मिली भीख से गुज़ारा कर लेती हूँ .’’

उसका ऐसा उत्तर सुन रश्मि और भी गुस्सा हो गयी और तहकीकात करने के इरादे से उसके साथ ही मंदिर पहुँच गयी . पुजारी ने बताया .

‘’ पुनिया है ये अनाथ लड़की पास की झुग्गी झोंपड़ी में रहने वाली ..कूड़ा कचरा बीन कर गुज़ारा करती थी अपना .उसी कूड़े में इसे  एक नवजात बच्ची मिली .मदद की गुहार लगाने सभी के पास गयी .पुलिस ने भी एक न सुनी .उल्टा उसे ही दोष देने लगे.’’

खुद अनाथ होकर उसे फिर अनाथ बना वहीँ  फेंक भी नहीं सकी .उसे लेकर कूड़ा भी नहीं बीन सकती तो भीख माँग कर तबसे इसे पालने का ज़िम्मा ले लिया  ‘’.

रश्मि कुछ देर चुप रही उसने जल्दीबाज़ी एक निर्दोष पर कितने आरोप लगा दिए .फिर पुनिया से बोली ‘’अगर चाहो तो तुम  मेरे घर काम कर सकती हो और हम दोनों मिलकर इस बच्चे को पालेंगे .’’

पुनिया आँखों में आँसू भर उसे देखती रह गयी .

 

ज्योतिर्मयी पंत

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