सफर और हमसफर

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सफर और हमसफर

By | 2017-10-31T13:26:16+00:00 October 31st, 2017|Categories: कविता|3 Comments

सफर और हमसफर

ज़िन्दगी के सफर में कितनी यादें हम संजोते हैं
चाहते हैं जिनको दिलोजान से, संग उनके मुस्कुराते हैं
क्या मैं बताऊं गुण उस दिलदार के
जो प्यार मुुझे इतना करता है
मेरा यार मुझपे मरता है
उसकी हर एक अदा का अपना अंदाज है
वो मेरे प्यार की, मेरे इंतेज़ार की एक मिशाल है
लम्हा हर एक खुशी का हो, संग उसी के
ज़िन्दगी के हर सफर में, वो बने हमसफर मेरा
यादें जो हमने संजोई हैं ज़िन्दगी के लिए
छूटे न दामन एक दूजे से कभी भी हमारा
है साथ उनका हमको जाँ से भी प्यारा
इस ज़िन्दगी के सफर में, ऐसा हमसफ़र है हमारा

 

सुबोध

31.10.17

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3 Comments

  1. Madhulika October 31, 2017 at 11:26 pm

    Very nice

    Kabhi sath na chhodna apne is hamsafar ka zindagi ke safar me

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  2. Juli verma March 18, 2018 at 12:41 pm

    very nice poem

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  3. SUBODH PATEL उर्फ सुभाष March 18, 2018 at 4:22 pm

    सुक्रिया जूली

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