पैगाम -ऐ- मुहोबत (ग़ज़ल)

पैगाम -ऐ- मुहोबत (ग़ज़ल)

By | 2017-10-31T13:26:28+00:00 October 31st, 2017|Categories: गीत-ग़ज़ल|2 Comments

क्या भेजें तुम्हें पैगाम ,

बड़ी उलझन में हैं हम .

हर लफ्ज़ पर रुक जाते हैं,

ख्यालों में यूँ  गम हैं हम.

नज़रों में तुम्हारा अक्स है,

और नज़रों के सामने भी हो तुम .

क्या करूँ ? तुम्ही बताओ न!,

कुछ कहूँ या खुद ही समझ लोगे तुम .

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संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

2 Comments

  1. SUBODH PATEL October 31, 2017 at 8:56 pm

    कुछ उलझनो को यू सुलझाया नही करते
    मोहब्बत के गम को यू दिखाया नही करते
    ये मोहब्बत है, हाँ ये मोहब्बत ही है
    मिले जो दर्द फिर भी दिखाया नहीं करते

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  2. ओनिका सेतिया 'अनु' October 31, 2017 at 11:35 pm

    very nice gazal..

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