मोती

मोती

By | 2017-11-08T23:05:24+00:00 November 8th, 2017|Categories: कविता|0 Comments

मोती ज्ञान के लुटाकर देखिये।
किसी को गले लगाकर देखिये।।

किसी को पाटी थमाकर देखिये।
अनपढ़ को जरा पढ़ाकर देखिये।।

अंधेरों में दीप जलाकर देखिये।
किसी का घर सजाकर देखिये।।

किस्मत को आजमाकर देखिये।
श्रम स्वेद जरा बहाकर देखिये।।

जल की हर बूंद बचाकर देखिये।
प्यासे की प्यास बुझाकर देखिये।।

कवि राजेश पुरोहित
भवानीमंडी

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