बेचैन अखियां

बेचैन अखियां

By | 2017-12-02T14:28:41+00:00 December 2nd, 2017|Categories: मुक्तक|1 Comment

छुपी हुई कोई बात मन में,
बड़ी हलचलें मची हैं तन में।
अंखियों में उफनाहट नीर खौला,
कपाटों को खोल धीमे से बहता चला।
आँसू भी बोल गए साथ था तेरा यहीं तक।
कोई ही शायद बचता वरना सब जाते टपक।
मोतिन से चमकता वह; पर दिखता अंगार न निरा,
झरने से बहते हुए कपोलों और हृदय पर जा गिरा।
अंखियाँ भी अब अंधी हुई और हृदय पर आहूति।
सपक-सपक सी सिसकियों से बढ़ी हृदय गति।
अंखियाँ अब मिचतीं चलीं और दंतियाँ भी कढ़ी।
सर्वेश कुमार मारुत

Comments

comments

Rating: 5.0/5. From 3 votes. Show votes.
Please wait...
Spread the love
  • 2
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    2
    Shares

About the Author:

सर्वेश कुमार मारुत पिता- रामेश्वर दयाल पता- ग्राम व पोस्ट- अंगदपुर खमरिया थाना- भुता तहसील- फरीदपुर बरेली 243503

One Comment

  1. RAHUL SINGH December 5, 2017 at 5:02 pm

    khoobsurat Rachna

    No votes yet.
    Please wait...

Leave A Comment