नेक अध्यापक

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नेक अध्यापक

By | 2017-12-08T18:38:26+00:00 December 8th, 2017|Categories: कहानी|0 Comments

 

हमारे घर के सामने एक अध्यापक रहते थे वह बहुत ही शालीन व शांतचित्त अपने मगन रहते थे। चेहरे पर चश्मा लगाए रखते थे जिससे उनका चेहरा और ओजस्वी पूर्ण लगता था। उनके दो बच्चे थे दोनों ही लड़के थे। सभी बच्चों को बड़े मनोयोग से पढ़ाते बच्चे उनका मान सम्मान करते थे। गरीब बच्चों को पढ़ाना उनके स्वाभाव में था जिसकी कभी फीस नहीं लेते थे।।
लेकिन उनकी पत्नी को कभी यह अच्छा नहीं लगता था
वह नहीं चाहती थीं वह अपना कीमती समय इन गरीब बच्चों को दें, इसी कारण उनके घर में कलह का वातावरण रहता था और उनके यहाँ से लड़ाई की आवाज आती रहती थी वह अपनी पत्नी को बहुत समझाते थे,अक्सर कहा करते थे इनको पढ़ाने वाला कोई नहीं है अगर मैं इनको पढ़ाता हूँ यह एक अच्छे नागरिक बनेंगे थोड़ा ही, सही देश सेवा में हमारा योगदान होगा, इनके मां बाप पढ़े लिखे नहीं है, जो इनको पढ़ा सकें इतना समझाने के बावजूद उनकी पत्नी को कुछ समझ नहीं आता था ऐसे ही दिन कट रहे थे।।
एक दिन अचानक उनके घर से जोर जोर से रोने की आवाज आने लगी। आखिर बात क्या हो गयी भागकर उनके घर पहुंच गयी वहां जाकर देखा अध्यापक जी की हृदय गति रूक जाने से उनका निधन हो गया। पहाड़ जैसा दुख उनकी पत्नी पर आ गया और बच्चों की जिम्मेदारी भी पढ़ी-लिखी इतनी नहीं थी बच्चों का भरण-पोषण कर सकें।।
एक महीना निकल जाने के बाद सोचा अध्यापक जी की पत्नी से मिलकर आऊं शायद उनकी यथासंभव सहायता कर सकूं। वहां जाकर जब मेरी उनकी पत्नी से बात हुई तो मैं दंग रह गई, उनकी पत्नी ने बताया मैं तो इतनी पढ़ी लिखी नहीं हूँ, जो कुछ कार्य कर सकती, बच्चे अभी छोटे हैं।इनका एक शिष्य था जो कि पढ़ने में बहुत मेधावी था और गरीब भी, अध्यापक जी ने उसे बड़े मनोयोग से पढ़ाया था, अब वह एक अच्छा इंजिनियर बन चुका था उसने उन सब की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली और कहा जबतक आपके बच्चे किसी योग्य नहीं हो जाते जबतक आपके परिवार की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है आज जो मैं हूँ उन्हीं नेक अध्यापक की वजह से हूँ वर्ना कहीं मजदूरी कर रहा होता।।
घर लौटते समय सोच रही थी नेक कार्यों का फल जरुर मिलता है ऊपर वाला किसी भी रास्ते से दो गुना कर लौटता है।।

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