मैं तो हूँ एक विद्रोही

मैं तो हूँ एक विद्रोही

By | 2017-12-18T08:12:02+00:00 December 18th, 2017|Categories: व्यंग्य|Tags: , , |0 Comments

मैं तो हूँ एक विद्रोही
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तर्क कसौटी पर कसता मैं बात तभी अपनाता हूँ ।
मैं तो हूँ एक विद्रोही विरुद्ध लहर के जाता हूँ ।

पाखंडवाद से घृणा करता मानव से मैं प्यार करूँ ।
मानव में ही ईश्वर दिखता पत्थर को न प्यार करूँ ।

जाने कितने ढोंगी,मूर्ख हमने तो पुजते देखे ।
इनके हाथों चीरहरण नित अबला के होते देखे ।

पत्थर को जलपान करायें लोगों का अपमान करें ।
कालेधन के हिस्से से ईश्वर का सम्मान करें ।

ईश्वर देता होता तो भिखमंगों की फौज न होती ।
दुनिया की दौलत में केवल कुछ की ही मौज न होती ।

ईश्वर का भय दिखलाकर, पागल खूब बनाया है ।
पाखंडी लोगों की बातें कोई समझ न पाया है ।

बिना परिश्रम मिले न ‘पाई’ मैं तुमको समझाता हूँ ।
मैं तो हूँ एक विद्रोही विरुद्ध लहर के जाता हूँ ।

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