महुआ चुनती लड़की

महुआ चुनती लड़की

By | 2017-12-21T09:53:53+00:00 December 21st, 2017|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

महुआ चुनती
अपनी गीत में ही
मस्त हुई लड़की
जब हँसती है
तो गिरता महुआ.
मन करता है
खोँस दूँ
उसकी जूृड़ा में
फूलों की डाली
लाल पलाश की.
उसे पहना दूँ माला
लाल सेमल फूल की
वह महूआ चुनती
प्यार की परी.

जब नदी किनारे बैठकर
पैरोँ से पानी हिलाती है
तब बनता है
हुडरु के जैसा जलप्रपात.
उसकी पायल की रुनझुन
झरना के पानी से
सुर मिलाती है
आती है तितलियाँ
सुनने को पायल की
रुनझुन………
सामने बैठी
पपीहा की जोड़ी
नाचने लगती है

मुश्कान हँसी के साथ
तिरछी नजरवाली
वह महुआ चुनती
लड़की
मन करता है
उसकी जूड़ा में
खोंस दूँ
फूलों की डाली
अैार खिला दूँ
प्यार की निशानी
एक पुड़िया पान.

–  चन्द्र मोहन किस्कु

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