पेड़ -लताओं के हुल

पेड़ -लताओं के हुल

By | 2017-12-21T09:52:47+00:00 December 21st, 2017|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

अब जंगल -पर्वतों में
पलाश फूल खिला है
लाल अति सुन्दर
जैसे कोई
हुल का आग
जलाया है
देश के हर कोने में
जंगल -पर्वतों के
पेड़ -लताएं
अब खड़े हुए हैं
सर ऊँचा कर
बन्द मुट्ठी को
आसमान की अोर
दिखाकर
मनुष्यों को होशियार कर रहे है
जो षड़यन्त्र चल रहा है
उन्हे उजाड़ने की
मनुष्यों के मन में
श्रेष्ठ होने की जो चाहत
फल -फूल रहा है
उसके खिलाफ ही
पेड़ और लताएं
हुल का आरम्भ किया है
सिदो-कान्हुोँ
के जैसा हुल
इसलिए तो
अब _____
पहाड़-पर्वतों के
पेड़-लताआें मे
हुल के रंग
लाल लगा हुआ है.

–   चन्द्र मोहन किस्कु

Comments

comments

No votes yet.
Please wait...
Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

About the Author:

Leave A Comment